आदित्यपुर: बिजली सामग्री के कथित गबन को लेकर आदित्यपुर थाना में दर्ज मामले पर नेहा इलेक्ट्रिकल के प्रोपराइटर एवं बिजली ठेकेदार शंभू झा ने सवाल उठाए हैं. झा का दावा है कि जिस बिजली सामग्री को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया, उस सामग्री के संबंध में संबंधित अधिकारियों द्वारा पहले ही अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया जा चुका था. उन्होंने अपने दावे के समर्थन में विभागीय दस्तावेज और सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी होने की बात कही है.


शंभू झा का आरोप है कि वर्ष 2022 से जुड़े मामले में तत्कालीन जूनियर इंजीनियर दिलीप प्रसाद की लिखित सूचना के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. उनका कहना है कि संबंधित सामग्री जमशेदपुर सेंट्रल स्टोर से निर्गत हुई थी और उसके संबंध में सेंट्रल स्टोर के संबंधित कार्यपालक अभियंता दिलीप मार्डी की ओर से NOC दिया गया था.
झा का यह भी दावा है कि आदित्यपुर विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संदीप कुमार की ओर से भी संबंधित मामले में NOC दिया गया था. उनका सवाल है कि यदि संबंधित सामग्री का विभागीय स्तर पर पहले ही हिसाब और NOC उपलब्ध था तो गबन का मामला किन दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर दर्ज कराया गया.
₹4 लाख के UPI ट्रांसफर का भी दावा
शंभू झा ने जूनियर इंजीनियर दिलीप प्रसाद से जुड़े एक अन्य वित्तीय लेन-देन को लेकर भी जांच की मांग की है. उनका दावा है कि उनके खाते से दिलीप प्रसाद के बैंक खाते में UPI के माध्यम से कुल चार लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे. हालांकि इस रकम के लेन-देन का उद्देश्य क्या था और इसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. झा ने मांग की है कि बैंक एवं UPI ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि रकम किस उद्देश्य से दी गई थी.
पुलिस जांच में अहम हो सकते हैं NOC और विभागीय रिकॉर्ड
मामले में अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्राथमिकी दर्ज कराने के समय विभाग के पास संबंधित सामग्री का क्या रिकॉर्ड मौजूद था. यदि NOC प्राथमिकी से पहले जारी हुआ था तो उसकी तारीख, उसमें दर्ज सामग्री का विवरण, स्टोर से निर्गत सामग्री का रिकॉर्ड और प्राथमिकी में वर्णित सामग्री का मिलान पुलिस जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है. शंभू झा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि NOC, स्टोर रिकॉर्ड, RTI से प्राप्त दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जाए.
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

