सरायकेला: कांड्रा बाजार में सड़क और नाली पर अतिक्रमण का मामला एक बार फिर चर्चा में है. वर्ष 2020 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, सरायकेला- खरसावां के कार्यालय से अतिक्रमण हटाने का लिखित आदेश जारी होने के बावजूद करीब छह साल बाद भी समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर उस सरकारी आदेश पर कितनी कार्रवाई हुई और अतिक्रमण दोबारा कैसे कायम हो गया.


10 जनवरी 2020 को जारी आदेश में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि कांड्रा बाजार में स्थानीय दुकानदारों द्वारा सरायकेला रोड से इंटरनेशनल स्कूल होते हुए बाजार रेलवे ओवरब्रिज तक सड़क एवं सड़क किनारे नाली का अतिक्रमण किया गया है. इसके कारण कांड्रा मोड़ और बाजार क्षेत्र में जाम लगने के साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है.
आदेश में अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई करने के साथ पुलिस पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति और अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की व्यवस्था का भी उल्लेख था.
*आदेश हुआ तो अनुपालन कहां तक हुआ ?*
छह साल बाद इस आदेश के सामने आने से अब प्रशासनिक अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार कांड्रा बाजार के कई हिस्सों में आज भी सड़क किनारे दुकानें, अस्थायी संरचनाएं और व्यावसायिक गतिविधियां आवागमन को प्रभावित कर रही हैं.
ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 2020 के आदेश के बाद कितना अतिक्रमण हटाया गया था ? अभियान चला तो अतिक्रमण दोबारा कैसे हुआ ? यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आदेश किस स्तर पर लंबित रह गया ? इन बिंदुओं की प्रशासनिक समीक्षा की मांग उठ रही है.
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पुराने आदेश की फाइल और उसके अनुपालन की स्थिति की समीक्षा कराने के साथ वर्तमान स्थिति का स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है. साथ ही सड़क और नाली की वास्तविक सीमा चिह्नित कर अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई तथा नियमित निगरानी की मांग की गई है.
मामला अब केवल कांड्रा बाजार के अतिक्रमण तक सीमित नहीं है. सवाल छह साल पुराने सरकारी आदेश की जवाबदेही का भी है. आदेश जारी हुआ था तो उसका परिणाम धरातल पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है ?
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

