सरायकेला: तीसरी सोमवारी के पावन अवसर पर सरायकेला में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. अपना चौक की ओर से लगातार 12वीं वर्ष विशाल कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया. संजय नदी से शुरू हुई यह कांवड़ यात्रा करीब 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सरायकेला के कुदरसाईं मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की.


सुबह से ही संजय नदी के तट पर कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. देखते ही देखते पूरा क्षेत्र भगवा रंग में रंग गया. हाथों में कांवड़ लिए बच्चे, युवा, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए. श्रद्धालुओं के उत्साह और उमंग के बीच पूरा वातावरण ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘बाबा तेरा सहारा है’ के जयघोष से गूंजता रहा.

संजय नदी से शुरू हुई कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह पेयजल, शरबत और फल की व्यवस्था की गई थी. रास्ते में कांवड़ियों को रोककर पानी और शरबत पिलाया गया तथा फल वितरित किए गए. सेवा शिविरों में लोगों ने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ कांवड़ियों की सेवा की.
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था. उम्र की सीमाएं टूट गईं और भक्ति के रंग में हर कोई रंगा नजर आया. बुजुर्ग श्रद्धालु जहां आस्था के साथ कदम बढ़ा रहे थे, वहीं बच्चे और युवा पूरे जोश के साथ बोल बम के जयकारे लगाते हुए यात्रा में आगे बढ़ रहे थे.
संजय नदी से शुरू हुई कांवड़ यात्रा करीब सात किलोमीटर का सफर तय कर कुदरसाईं मंदिर पहुंची. यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया. ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच कांवड़ियों का कारवां आगे बढ़ता रहा. सड़क पर जहां नजर जाती, वहां भगवा वस्त्र और कांवड़ लिए श्रद्धालुओं की कतार दिखाई दे रही थी.

कांवड़ियों के चेहरे पर थकान कम और भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था व उत्साह अधिक दिखाई दे रहा था. ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘बाबा मेरा सहारा है’ के नारों से पूरा सरायकेला शिवमय हो उठा.
लंबी पदयात्रा पूरी करने के बाद कांवड़ियों का जत्था कुदरसाईं मंदिर पहुंचा. यहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया. संजय नदी से कांवड़ में लाए गए जल को भगवान भोलेनाथ को अर्पित कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना की.
जलाभिषेक के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की गई थी. कांवड़ियों ने प्रसाद ग्रहण किया और इसके बाद धार्मिक आयोजन का समापन हुआ.
अपना चौक की ओर से आयोजित यह कांवड़ यात्रा अब सरायकेला की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है. आयोजकों के अनुसार पिछले 12 वर्षों से लगातार तीसरी सोमवारी के अवसर पर कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है. हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या और उत्साह बढ़ता जा रहा है.
आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कांवड़ यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ सेवा, सहयोग और सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया.
तीसरी सोमवारी पर निकली इस विशाल कांवड़ यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सरायकेला की धरती पर भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है. संजय नदी से कुदरसाईं मंदिर तक सात किलोमीटर तक चलता श्रद्धालुओं का कारवां और गूंजता ‘बोल बम’ का जयघोष पूरे इलाके में भक्ति का माहौल पैदा कर गया.
प्रमोद सिंह (संपादक)


































































