
बोकारो: चिरा चास क्षेत्र से वन विभाग ने एक गोह (मॉनिटर लिजार्ड) का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया. वन विभाग ने बताया कि गोह एक संरक्षित वन्यजीव है और इसका शिकार करना, पकड़ना, घायल करना, पालना, खरीदना, बेचना या इसके किसी भी अंग का व्यापार करना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दंडनीय अपराध है.


विभाग के अनुसार अधिनियम की धारा-9 के तहत संरक्षित वन्यजीवों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है. वहीं नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ धारा-51 के तहत कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है.
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि गोह सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करती. यह खेतों और जंगलों में चूहों, कीटों तथा अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि आसपास गोह या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो उसे पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें. सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तत्काल निकटतम वन विभाग या वन्यजीव बचाव दल को सूचना दें. प्रशिक्षित वनकर्मी वन्यजीव का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ देंगे.
रिपोर्ट: शुभम मिश्रा





