Jamtara Chittaranjan Locomotive Works जामताड़ा: सीएलडब्ल्यू अप्रेंटिस भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा. 19 प्रशिक्षुओं की ट्रेनिंग रोकी, चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
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जामताड़ा: चित्तरंजन स्थित चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्ल्यू) में एक्ट अप्रेंटिस भर्ती को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सीएलडब्ल्यू टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर ने फिटर और इलेक्ट्रीशियन ट्रेड के 19 एक्ट अप्रेंटिस की प्रशिक्षण अवधि बीच में ही समाप्त करने का आदेश जारी किया है.
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1 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार संबंधित प्रशिक्षुओं को 30 जून के बाद प्रशिक्षण जारी रखने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि आदेश में इस कार्रवाई के पीछे का कोई कारण स्पष्ट नहीं किया गया है. जानकारी के अनुसार सभी प्रभावित प्रशिक्षु TS/157/Act Apprentice 3/12/2025 Batch के तहत चयनित हुए थे. आदेश में केवल प्रशिक्षुओं के नाम, अभिभावक का नाम और ट्रेड का उल्लेख किया गया है, जबकि चयन निरस्त करने का आधार सार्वजनिक नहीं किया गया है. इससे पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं.
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब सीआरएमसी नेता इंद्रजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि सीएलडब्ल्यू में अप्रेंटिसशिप दिलाने के नाम पर लंबे समय से एक संगठित गिरोह सक्रिय है. आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों के अंकपत्रों में हेराफेरी कर उन्हें चयनित कराया गया. बताया जा रहा है कि मार्कशीट में अंकों की संख्या बदल दी गई, जबकि शब्दों में लिखे अंक यथावत छोड़ दिए गए. दस्तावेज सत्यापन के दौरान यही विरोधाभास सामने आने पर कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.
यदि आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों का सही और प्रभावी सत्यापन किया गया होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती. लोगों का यह भी सवाल है कि जब भर्ती प्रक्रिया कई स्तरों की जांच के बाद पूरी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल प्रशिक्षुओं तक ही सीमित क्यों रखी जा रही है.
क्षेत्र में यह मांग तेज हो गई है कि केवल 19 प्रशिक्षुओं के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए. यदि किसी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही, मिलीभगत अथवा नियमों की अनदेखी हुई है तो उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए. दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की भी मांग उठ रही है.
फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच का दायरा केवल 19 प्रशिक्षुओं तक सीमित रहेगा या भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी.
भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि चयन में अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी केवल अभ्यर्थियों की है या फिर पूरे सिस्टम की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए.