गम्हरिया: आदित्यपुर थाना क्षेत्र के मोतीनगर में वन विभाग की जमीन पर कथित अवैध खटाल को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है. पत्रकार सुनील गुप्ता और उनके पुत्र के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद शुरू हुआ मामला अब वन विभाग की संभावित कार्रवाई तक पहुंच गया है. यदि विभाग ने बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया तो इसका असर केवल एक खटाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास रहने वाले दर्जनों गरीब आदिवासी परिवार भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.



बताया जा रहा है कि पत्रकार के साथ मारपीट की घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था. बाद में स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद सशर्त समझौते की बात सामने आई. आरोप है कि समझौते के तहत अवैध खटाल हटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कथित रूप से खटाल नहीं हटाया गया.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समाज के कुछ प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक हस्तक्षेप के बावजूद समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया. वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने वन विभाग की जमीन पर अपना कब्जा बरकरार रखा है.
इस बीच वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के संकेत दिए हैं. डीएफओ सबा आलम के अनुसार मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. मंगलवार को वन विभाग का एक कर्मी विवादित स्थल पहुंचा और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाई.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है तो वर्षों से वहां रह रहे कई गरीब परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि विवाद एक अवैध खटाल को लेकर है तो पूरी बस्ती पर संकट क्यों आए.
मामले को लेकर कई तरह के आरोप भी लगाए जा रहे हैं. कुछ लोगों का दावा है कि वर्षों से अवैध कब्जे के बावजूद संबंधित खटाल पर कार्रवाई नहीं हुई. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही संबंधित विभागों की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है.
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग केवल विवादित अतिक्रमण पर कार्रवाई करता है या व्यापक अभियान चलाता है, जिससे अन्य परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं.
Edited By Sarita





