सरायकेला: शहरी क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यशैली अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. विभाग द्वारा प्रतिदिन मेंटेनेंस और लेबर कार्य के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की चर्चा है, लेकिन इसके बावजूद शहर की बिजली व्यवस्था लगातार बदहाल बनी हुई है. आए दिन बिजली फॉल्ट, लो वोल्टेज, ट्रांसफार्मर खराबी, तार टूटने और घंटों बिजली कटौती से आम लोग परेशान हैं.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग कागजों में बड़े पैमाने पर मेंटेनेंस दिखाकर भारी-भरकम बिल तैयार कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर वास्तविक काम नजर नहीं आ रहा. कई मोहल्लों में जर्जर तार, खुले बिजली पोल, लटकते केबल और लगातार होने वाली स्पार्किंग से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है.
लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से बिजली लाइनों की जांच और मरम्मत की जा रही होती, तो हर दूसरे दिन बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होती. कई इलाकों में हल्की बारिश या तेज हवा के बाद घंटों बिजली गुल हो जाती है. भीषण गर्मी में लो वोल्टेज के कारण पंखे, कूलर और पानी की मोटर तक सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं.
शहरवासियों का आरोप है कि विभाग केवल अस्थायी मरम्मत कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा. लोगों का कहना है कि अधिकारी फाइलों में मेंटेनेंस पूरा दिखा रहे हैं, लेकिन आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा.
व्यापारियों ने भी बिजली व्यवस्था पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि बार-बार बिजली कटौती से कारोबार प्रभावित हो रहा है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो रहे हैं. वहीं छात्रों की पढ़ाई और घरेलू जलापूर्ति पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है.
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने बिजली विभाग द्वारा पिछले कई महीनों में मेंटेनेंस और लेबर मद में खर्च की गई राशि की निष्पक्ष जांच की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है, तो पूरे मामले में कहीं न कहीं गंभीर अनियमितता की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
अब सरायकेला की जनता खुलकर सवाल पूछ रही है कि जब रोजाना लाखों रुपये मेंटेनेंस पर खर्च किए जा रहे हैं, तो आखिर शहर अब भी अंधेरे, लो वोल्टेज और फॉल्ट की समस्या से क्यों जूझ रहा है.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह



