सरायकेला/ Pramod Singh जिले के कुचाई प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है. कुचाई प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिजार में शिक्षकों की भारी कमी से बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है. विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक कुल 118 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, जबकि विभिन्न विषयों के लिए 8 पद स्वीकृत हैं. हैरानी की बात यह है कि सभी पद खाली पड़े हैं और पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी सिर्फ एक सहायक शिक्षक महेश चंद्र लागुरी के कंधों पर है, जो प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं.


एक ही शिक्षक को पढ़ाई के साथ- साथ मिड-डे मील, विभागीय कागजी कार्य और प्रशासनिक बैठकों की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है और शैक्षणिक स्तर लगातार गिरता जा रहा है.

स्थिति से चिंतित होकर शुक्रवार को बिजार गांव में अभिभावकों और ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई. बैठक में रूगुडीह पंचायत के मुखिया करम सिंह मुंडा और उपमुखिया सुखलाल मुंडा सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे. मुखिया करम सिंह मुंडा ने कहा कि एक शिक्षक बच्चों को पढ़ाएंगे या विभागीय काम संभालेंगे, इस हालात में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि शिक्षक की कमी को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है.
अभिभावकों ने साफ कहा कि एक शिक्षक के भरोसे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है. पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई बाधित है और बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है.
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि एक सप्ताह के भीतर विद्यालय में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई, तो स्कूल में ताला बंद कर दिया जाएगा और बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया जाएगा. इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है.

