खूंटी: जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. जहां प्रतिबंधित संगठन PLFI को बड़ा झटका देते हुए उसके एरिया कमांडर हाबिल मुंडू उर्फ प्रफुल्ल मुंडू ने पुलिस- प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है.


करीब 1 लाख रुपये का इनामी हाबिल मुंडू लंबे समय से खूंटी, मुरहू, तोरपा और आसपास के इलाकों में सक्रिय था. उसके खिलाफ विभिन्न थानों में लगभग 20 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें रंगदारी, लूट, फायरिंग और हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं.
हाबिल मुंडू ने उपायुक्त आर. रोनिटा और एसपी मनीष टोप्पो के समक्ष आत्मसमर्पण किया. सरेंडर के दौरान उसके पास से 9 एमएम पिस्टल, 7.65 एमएम पिस्टल, एक देसी कट्टा, 13 जिंदा कारतूस और 2 वॉकी- टॉकी बरामद किए गए हैं.
बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2012 से संगठन से जुड़ा हुआ था और इलाके में कई बड़ी वारदातों में सक्रिय भूमिका निभा चुका है. आत्मसमर्पण के बाद उसने संगठन के भीतर शोषण, भय और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव को इसकी मुख्य वजह बताया है.
एसपी मनीष टोप्पो के अनुसार, झारखंड पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लगातार अभियान से उग्रवादियों पर दबाव बढ़ा है और अब इसका असर जमीन पर दिख रहा है. सरकार की “नई दिशा” नीति के तहत उग्रवादियों के मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया तेज हुई है और यह सरेंडर उसी का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है.
आत्मसमर्पण के मौके पर अधिकारियों ने हाबिल मुंडू का स्वागत करते हुए उसे एक लाख रुपये का प्रतीकात्मक चेक भी सौंपा. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस सरेंडर से पीएलएफआई नेटवर्क कमजोर होगा और आने वाले समय में और भी उग्रवादी हथियार छोड़ सकते हैं.

