सरायकेला: आदित्यपुर नगर निगम में डिप्टी मेयर पद के लिए सोमवार को हुए चुनाव के बाद अब सियासी गलियारों में ‘गद्दार पार्षदों’ की तलाश तेज हो गई है. चुनाव परिणाम सामने आने के बाद दोनों खेमों में क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाएं गर्म हैं.


जिला प्रशासन ने अंकुर सिंह को विजयी घोषित करते हुए उन्हें जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया. मतगणना के अनुसार अंकुर सिंह को 18 मत और अर्चना सिंह को 17 मत मिले. परिणाम घोषित होते ही अर्चना सिंह के समर्थक पार्षदों ने री-काउंटिंग की मांग करते हुए मतदान स्थल पर ही डेरा डाल दिया. हालांकि जिले के उपायुक्त सह जिला निर्वाची पदाधिकारी ने उनकी मांग को ख़ारिज कर दिया.
अर्चना सिंह का दावा है कि उनके समर्थन में 20 पार्षद थे. उनके समर्थन में खड़े पार्षदों में वार्ड 26 की पार्षद वेदना गोप, वार्ड 31 की पार्षद रिंकू राय, वार्ड 25 की पार्षद उत्तरा प्रधान, वार्ड 11 की पार्षद मंजू देवी, वार्ड 1 के पार्षद वनमाली दास, वार्ड 33 के पार्षद श्याम हाईबुरु, वार्ड 4 के पार्षद शुभम कुमार पांडे, वार्ड 3 की पार्षद पिंकी चौधरी, वार्ड 16 की पार्षद राजरानी महतो, वार्ड 27 की पार्षद रिंकी कुमारी, वार्ड 12 के पार्षद मोतीलाल बिसोई, वार्ड 24 के पार्षद राम प्रसाद मुखी, वार्ड 10 के पार्षद शंकर सरदार, वार्ड 32 की पार्षद मालती देवी, वार्ड 35 की पार्षद संगीता समद, वार्ड 14 की पार्षद सुमिता बेहरा, वार्ड 2 की पार्षद सुप्रिया महतो, वार्ड 29 की पार्षद अर्चना कुमारी, वार्ड 6 की पार्षद विनीता कुमारी और वार्ड 34 की पार्षद रीता देवी शामिल हैं.
इसी बीच चंपाई सोरेन भी जिला मुख्यालय पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि हाल के दिनों में चंपाई सोरेन का समर्थन जिस-जिस उम्मीदवार को मिला, उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई. विधानसभा चुनाव से लेकर शहरी निकाय चुनाव तक उनके समर्थन वाले कई प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है, जिससे उनके वर्तमान राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार अंकुर सिंह का दावा था कि उन्हें 25 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है. यदि यह दावा सही माना जाए तो कम से कम 7 पार्षद ऐसे रहे जिन्होंने अंतिम समय में उनका साथ नहीं दिया. वहीं अर्चना सिंह के खेमे का दावा है कि उनके पास 20 पार्षदों का समर्थन था, जबकि उन्हें 17 मत ही मिले. ऐसे में उनके खेमे में भी क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम ने पार्षदों के बीच ‘गद्दारी’ की बहस को और तेज कर दिया है और दोनों ही खेमे अब अपने- अपने स्तर पर क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों की पहचान करने में जुट गए हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी पक्ष को मतगणना या चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति है तो वे सक्षम न्यायालय में चुनाव याचिका दाखिल कर सकते हैं. न्यायालय आवश्यक समझे तो मतगणना की जांच या पुनः सत्यापन का आदेश दे सकता है. फिलहाल आदित्यपुर नगर निगम का यह चुनाव स्थानीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे प्रशासन या न्यायिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं. साथ ही आदित्यपुर नगर निगम के लिए एक बड़ा बहस का मुद्दा बन गया है. वैसे कोर्ट की बात करें तो यही वो विधानसभा है जहां 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे गणेश महाली करीब 1115 वोट से चंपई सोरेन से चुनाव हार गए थे. कई बार रिकाउंटिंग के बाद भी फैसला चंपई सोरेन के पक्ष में ही आया था. उस वक्त गणेश महली ने कोर्ट का रुख किया था जिसका फैसला आज तक नहीं आ पाया और गणेश महाली के विधायक बनने का सपना चकनाचूर हो गया. इस मामले में भी कोर्ट से इंसाफ मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है. इसका एकमात्र विकल्प अविश्वास प्रस्ताव ही हो सकता है जो 6 महीने बाद लाने का प्रावधान है.

