सरायकेला/ Pramod Singh जल संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए जिला प्रशासन ने ‘पानी की खेती’ नामक पायलट परियोजना की शुरुआत की है. उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने पारंपरिक विधि- विधान के साथ इस परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया. इस पहल का उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भू-गर्भ जल पुनर्भरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है.

बुधवार को शुरू की गई इस परियोजना के तहत वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से संग्रहित कर भूगर्भ में पुनर्भरित किया जाएगा. इससे क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार होगा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सरायकेला की छात्राओं को स्वच्छ और पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी.

उद्घाटन के बाद विद्यालय परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में परियोजना के उद्देश्य और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई. इस दौरान रथिन भद्र ने “पानी की खेती” परियोजना पर प्रस्तुति देते हुए वर्षा जल के वैज्ञानिक संग्रहण, भूगर्भ जल पुनर्भरण और जल के सतत उपयोग की प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया.
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगी. इसके सकारात्मक परिणामों के आधार पर भविष्य में इस तकनीक को जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इस तरह की जल संरक्षण तकनीक से आदिवासी समुदायों और किसानों को वर्ष भर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
उपायुक्त ने छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्हें नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि छात्राओं को केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगार सृजन करने की सोच विकसित करनी चाहिए.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन छात्राओं की बेहतर शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं और उज्ज्वल भविष्य के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा. इस अवसर पर जिला योजना पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, रथिन भद्र, राजा बागची (संस्थापक) तथा मनोज कुमार (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन) सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे.

