सरायकेला/ Pramod Kumar जिले में एक ओर जहां शिक्षकों की भारी कमी से स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर सरायकेला प्रखंड के चार ऐसे शिक्षक हैं जिन पर विभागीय अधिकारी खुलेआम मेहरबान नजर आते हैं.
ये शिक्षक विद्यालयों की बजाय ज्यादातर समय जिला या प्रखंड कार्यालयों में ही तैनात रहते हैं.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से एक पारा शिक्षक भी शामिल है. इनकी पहुंच और अधिकारियों से नजदीकी इतनी मजबूत है कि वर्ष के अधिकांश दिनों में ये अपने स्कूल के बजाय दफ्तरों में ‘डेप्युटेशन’ पर कार्यरत रहते हैं. जिले में नव नियुक्त शिक्षकों की काउंसलिंग से लेकर पुराने शिक्षकों की सेवा पुस्तिका संधारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य इन्हीं शिक्षकों से करवाए जाते हैं.

सूत्र बताते हैं कि सेवा पुस्तिका के संधारण के नाम पर ये शिक्षक अन्य शिक्षकों से मोटी रकम वसूलते हैं. इनकी पहुंच इतनी गहरी है कि इनकी अनुमति के बिना न तो किसी शिक्षक का डेप्युटेशन होता है और न ही कोई विभागीय कार्य संपादित किया जाता है.
बीआरसी कार्यालय में नियमित उपस्थिति
जब इनका डेप्युटेशन औपचारिक रूप से नहीं रहता, तब भी ये शिक्षक बीआरसी कार्यालय में मौजूद पाए जाते हैं.
कार्यदिवस में दोपहर के बाद ये स्कूल छोड़कर किसी न किसी बहाने कार्यालय पहुंच जाते हैं और अधिकतर समय वित्तीय कार्यों में व्यस्त रहते हैं.
इनॉग्रेशन कार्य में निभा रहे भूमिका
वर्तमान में बीआरसी में लाखों रुपए की लागत से निर्माण और इनॉग्रेशन का कार्य चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि इन चारों में से एक शिक्षक इस वित्तीय कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
बीईईओ कार्यालय में इन्हें विशेष अधिकार प्राप्त हैं, जहाँ ये शीशा युक्त चैंबर में बैठकर गोपनीय कार्य करते हैं. इस दौरान अन्य कर्मियों को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती.
बिना बायोमैट्रिक अटेंडेंस के भी मिलता है वेतन
विभागीय नियमों के अनुसार शिक्षकों को बायोमैट्रिक उपस्थिति देना अनिवार्य है, लेकिन इन शिक्षकों पर यह नियम लागू नहीं होता. सूत्रों का दावा है कि बिना बायोमैट्रिक अटेंडेंस के भी इनका वेतन भुगतान नियमित रूप से हो जाता है.
टेंडर और आयोजन पर भी नियंत्रण
जानकारी के मुताबिक, प्रखंड क्षेत्र में होने वाले सभी कार्यक्रमों के टेंडर इन्हीं चार शिक्षकों के नियंत्रण में रहते हैं. हाल ही में हुए प्रखंड स्तरीय खेलो- झारखंड कार्यक्रम में टेंट से लेकर भोजन की व्यवस्था तक का टेंडर इन्हीं शिक्षकों ने लिया था.
बिल किसी अन्य जगह से बनवाकर भुगतान भी इन्हीं के माध्यम से किया गया. सूत्रों के अनुसार, जब इनकी प्रतिनियुक्ति नहीं रहती, तब ये शिक्षक सुबह 9 बजे और दोपहर 3 बजे स्कूल जाकर केवल उपस्थिति दर्ज कर लौट आते हैं. स्थानीय लोगों और शिक्षकों के बीच इस पूरे प्रकरण को लेकर नाराज़गी और चर्चा दोनों है. अब देखना यह होगा कि जिला शिक्षा विभाग इस मामले पर क्या कार्रवाई करता है.
वैसे इस मामले पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सरायकेला एवं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी सरायकेला ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सारे आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है. साथ ही बीईओ ने सत्यता की जांच कराने की बात कही है. उन्होंने बताया कि अभी एक पखवाड़ा ही उनका हुआ है पदभार ग्रहण किये हैं इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

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