DESK REPORT झारखंड बने 25 बीतने को हैं. मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि 24 साल बाद भी झारखंड के कई ऐसे प्रखंड हैं जहां आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची है जो रत्नगर्भा राज्य की जमीनी हकीकत बयां करती है. यहां हम बात कर रहे हैं सिमडेगा जिले के कोलाबिरा प्रखंड की. जहां प्रखंड के डोमटोली पंचायत अंतर्गत कैरबेड़ा गांव के करीब 100 आदिवासी परिवारों के लिए मानसून किसी कैद से कम नहीं है.

गांव से बाहर निकलने के लिए भाकड़ बेड़ा नदी पार करनी होती है, जो बरसात में उफान पर रहती है. नदी पर लकड़ी का जर्जर पुल बना है, जो कभी भी गिर सकता है. लेकिन मजबूरी में ग्रामीण इसी पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को विवश हैं.
स्कूल- कॉलेज जाना भी मुश्किल
गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल-कॉलेज जाना होता है लेकिन पुल की जर्जर हालत देखकर वे भी पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं. बरसात के समय नदी का तेज बहाव और पुल की खस्ताहाल स्थिति उनके लिए डर का कारण बन जाती है. बुजुर्गों के लिए भी यह रास्ता जानलेवा साबित हो रहा है.
विकास का वादा नाले में बहा
ग्रामीणों ने बताया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान कई नेताओं ने यहां पुल निर्माण का वादा किया था. लेकिन चुनाव बीतते ही सबने मुंह मोड़ लिया. दशकों से पुल निर्माण की मांग हो रही है. आवेदन भी दिए गए लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला.
आपातकालीन स्थिति में बढ़ती है मुश्किल
बरसात के दिनों में गांव टापू बन जाता है. मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ता है. चारपहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते. ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल निर्माण की मांग की है ताकि उनकी जिंदगी की यह रोजमर्रा की परेशानी दूर हो सके.

