DESK झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक “दिशोम गुरु” शिबू सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहे 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली. इसके साथ ही राजनीति के एक युग का समापन हो गया.

आइये जाने शिबू सोरेन का जीवन परिचय और पारिवारिक परिष्ठभूमि
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हो गया. वे 81 वर्ष के थे. शिबू सोरेन 19 जून से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती थे. उनकी तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन की पुष्टि की. उन्होंने इसे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया. 11 जनवरी 1944 को जन्मे शिबू सोरेन झारखंड अलग राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता रहे हैं. उन्हें ‘दिशोम गुरु’ के रूप में आदिवासी समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था. शिबू सोरेन दुमका लोकसभा सीट से आठ बार सांसद चुने गए. वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने. साथ ही दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे. उन्होंने 1970 के दशक में ‘धान काटो आंदोलन’ चलाया था. उन्होंने महाजनी प्रथा और ज़मींदारी के खिलाफ आंदोलन किया. शिबू सोरेन पर राजनीतिक जीवन में कई आरोप लगे. लेकिन वे संघर्ष करते रहे और जनता के बीच लोकप्रिय बने रहे. उनकी जीवनी झारखंड की राजनीति और आदिवासी चेतना का दस्तावेज मानी जाती है.
उनके निधन की खबर से पूरे झारखंड में शोक की लहर है. झारखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को झारखंड के नेमरा गांव (तत्कालीन हजारीबाग जिला, वर्तमान रामगढ़) में हुआ था. वे एक संथाल आदिवासी परिवार से थे, जिसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मध्यमवर्गीय थी. उनके दादा चरण मांझी तत्कालीन रामगढ़ राजा कामाख्या नारायण सिंह के टैक्स तहसीलदार थे. उनके पिता सोबरन मांझी अपने समय के शिक्षित आदिवासियों में गिने जाते थे. वे शिक्षा के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास करते थे. सोबरन मांझी ने महाजनी प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई थी. इसी संघर्ष के कारण 27 नवंबर 1957 को उनकी हत्या लुकरैयाटांड़ गांव के पास कर दी गई. इस दर्दनाक घटना ने युवा शिबू सोरेन को सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन की राह पर प्रेरित किया. उनकी मां सोनामणि एक दृढ़ संकल्प वाली महिला थीं. पति की हत्या के बाद उन्होंने बच्चों की परवरिश अकेले की और महाजनों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा.
शिबू सोरेन की शादी रूपी सोरेन (रूपी मांझी) से हुई. यह विवाह 1960 के दशक में हुआ, जब शिबू सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय हो रहे थे. रूपी सोरेन ने न केवल परिवार को संभाला, बल्कि उनके राजनीतिक संघर्षों में भी सहयोग किया. शिबू सोरेन और रूपी सोरेन के चार बच्चे थे – तीन बेटे और एक बेटी.
सबसे बड़े बेटे दुर्गा सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े थे और राजनीतिक रूप से सक्रिय थे. वर्ष 2009 में उनका निधन हो गया. उनकी मृत्यु के बाद हेमंत सोरेन ने राजनीतिक विरासत को संभाला.
हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को हुआ. वे वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं. साथ ही, वे झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष भी हैं. हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन गांडेय से विधायक हैं और दो बेटे निखिल व अंश हैं.
शिबू सोरेन के सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन झामुमो के नेता हैं. वे झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं और दुमका से विधायक चुने गए.
उनकी इकलौती बेटी अंजलि सोरेन हैं, जिनके बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित है. शिबू सोरेन का पारिवारिक इतिहास आदिवासी समाज की चेतना, संघर्ष और राजनीति का प्रतीक बन चुका है. उनकी विरासत आज भी झारखंड की राजनीति में जीवित है.

