सरायकेला/ Pramod Singh सरायकेला जगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को महाप्रभु जगन्नाथ के नेत्र उत्सव के साथ- साथ उनके नव यौवन रूप के दर्शन की रस्म पूरी की गई. प्रभु जगन्नाथ के नेत्र उत्सव सह नव यौवन रूप के दर्शन के अवसर पर पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा- अर्चना की. जय जगन्नाथ के जयघोष, शंखध्वनि व पारंपरिक उलध्वनी हुलहुली के बीच चतुर्था मूर्ति के अलौकिक नव यौवन रूप के दर्शन भी हुए. इस अवसर पर पूजा के साथ- साथ हवन भी किया गया. चतुर्था मूर्ति को मिष्ठान्न व अन्न भोग भी चढ़ाए गए.

एक पखवाड़ा के बाद सरायकेला जगन्नाथ मंदिर के खुले पट
बीमारी के कारण 14 दिनों तक मंदिर के अणसर गृह में इलाजरत चतुर्था मूर्ति प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन स्वस्थ होकर नव यौवन स्वरूप में दर्शन दिए. इसे प्रभु का नव यौवन रूप कहा जाता है. ज्ञात हो कि स्नान पूर्णिमा पर 108 कलश पानी से स्नान करने के कारण चतुर्था मूर्ति बीमार हो गए थे. 14 दिनों तक अणसर गृह में प्रभु की गुप्त सेवा की गई. देशी नुस्खा पर आधारित जड़ी- बूटी से तैयार दवा पिलाकर इलाज किया गया. मंदिर में पूजा के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे थे.
ओडिशा के कारीगरों ने तैयार किया प्रभु जगन्नाथ का रथ, कल निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा
सरायकेला में ऐतिहासिक रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं. इस साल जगन्नाथ सेवा समिति रथयात्रा को अधिक भव्य बनाने में लगी है. इस साल महिलाओं को भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलेगा. साथ ही ओडिशा से आये ओडिशी कलाकारों द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया जायेगा. इस साल नये रथ का निर्माण भी पूरा हो चुका है. फिलहाल, उसकी सजावट का काम चल रहा है.
जानकारी के अनुसार, नील चक्र व बजरंग बली को रथ के ऊपर विराजमान कराया गया है. समिति के अध्यक्ष राजा सिंहदेव ने बताया कि 27 जून से प्रभु जगन्नाथ, अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नये रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे. पहले दिन बड़ दांड में विश्राम करने के बाद 28 जून को मौसीबाड़ी पहुंचेंगे.
ओडिशी नृत्य से होगा प्रभु का स्वागत
समिति अध्यक्ष राजा सिंहदेव ने बताया कि इस साल रथयात्रा के दौरान ओडिशा से 10 कलाकारों को आमंत्रित किया गया है. इनमें आठ महिलायें और दो पुरुष कलाकार शामिल हैं. ये कलाकार रथ के आगे- आगे ओडिशी नृत्य प्रस्तुत करेंगे. इसके साथ ही सरायकेला की स्थानीय कीर्तन मंडलियां भी रथ के आगे- आगे कीर्तन करती चलेंगी. उन्होंने बताया कि रथयात्रा में प्रभु को मौसीबाड़ी पहुंचने में दो दिन लगते हैं. इस दौरान दोनों दिनों में ओडिशी नृत्य व कीर्तन किया जायेगा.
राजा सिंहदेव ने बताया कि रथयात्रा में रथ को खींचने की परंपरा है. इस बार नये रथ को श्रद्धालु खींचकर मौसीबाड़ी तक ले जायेंगे. इसके लिए ओडिशा के भुवनेश्वर से रस्सी मंगवायी गयी है, जिसके सहारे आठ पहियों वाले इस भव्य रथ को खींचा जायेगा. जगन्नाथ स्वामी का रथ खींचने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी.
पहले दिन महिलाएं खींचेंगी प्रभु का रथ
रथयात्रा के पहले दिन केवल महिलाएं भगवान का रथ खींचेंगी. महिलाएं बड़दांड चौक से रथ को खींचकर गोपबंधु चौक तक लेकर जायेंगी, जहां भगवान का रात्रि विश्राम होगा. दूसरे दिन मौसीबाड़ी के लिए भगवान रथ पर सवार होकर प्रस्थान करेंगे. दूसरे दिन सभी श्रद्धालुओं को रथ खींचने का अवसर मिलेगा. राजा सिंहदेव ने बताया कि रथ का निर्माण ओडिशा के कारीगरों द्वारा किया गया है और अब सजावट का कार्य चल रहा है. सजावट के लिए ओडिशा के पीपली से वस्त्र और छतरियां मंगायी गयी हैं, जिन्हें कारीगर लगा रहे हैं. मालूम हो कि सरायकेला में रथयात्रा की परंपरा 350 वर्ष से भी अधिक पुरानी है. सरायकेला के प्रतिष्ठित महापात्र परिवार ने ढेंकानाल से भगवान के विग्रह को सरायकेला लाकर रथयात्रा की शुरुआत की थी. तब से लेकर आज तक हर साल यह रथयात्रा आयोजित होती आ रही है.
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