सरायकेला: देशभर में शुक्रवार को रथ यात्रा की धूम रही. इधर कला नगरी सरायकेला में भी रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया. बता दें कि सरायकेला में रथ यात्रा का इतिहास करीब 200 साल पुराना है. यहां पूरे विधि- विधान के साथ पारंपरिक तरीके से उड़ीसा के पुरी के तर्ज पर रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है.

शुक्रवार को राजा आदित्य प्रताप सिंह देव द्वारा विधि- विधान के साथ पूजा- अर्चना कर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को रथ पर विराजमान कराया गया उसके बाद हजारों की संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने रथ को खींचते हुए मौसी बड़ी के लिए प्रस्थान किया. बता दे कि सरायकेला में भगवान जगन्नाथ दो दिन में मौसीबाड़ी पहुंचते हैं. पहले दिन गुंडिचा मंदिर में विश्राम करते हैं अगले दिन मौसी बाड़ी पहुंचते हैं.
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शुक्रवार को रथ उत्सव में हिस्सा लेने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह स्थानीय विधायक चंपई सोरेन सपरिवार पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के आगे मत्था टेककर राज्य के शांति- सुख और समृद्धि की कामना की. उन्होंने राज्य के लोगों को रथ महोत्सव की शुभकामनाएं दी. बता दे कि इस साल भगवान नए रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकले हैं.
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चंपाई सोरेन (पूर्व मुख्यमंत्री)

