सरायकेला: जिले के गम्हरिया प्रखंड परिसर स्थित एसएफसी गोदाम में 28 अक्तूबर की रात लगी भीषण आग ने अब सनसनी फैला दी है. जिला उपायुक्त द्वारा गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी.

जांच टीम के नेतृत्वकर्ता जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो ने बताया कि गोदाम को जलाने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था. मौके से लाइटर और माचिस बरामद होने से शक गहराया है कि आगजनी की पूरी पटकथा पहले से तैयार की गई थी. टीम ने अपनी रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है.
हालांकि आग लगाने वालों की पहचान और एजीएम अभिषेक हजारा तथा ट्रांसपोर्टर राजू सेनापति के झुलसने की असल वजह का खुलासा फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही संभव होगा. गौरतलब है कि इस अग्निकांड में दोनों गंभीर रूप से झुलस गए थे. राजू सेनापति की मौत सोमवार को, जबकि अभिषेक हजारा ने मंगलवार को टीएमएच के बर्न यूनिट में दम तोड़ दिया था.
भोला तिवारी का नाम चर्चा में- डीलरों में खौफ, घटना के बाद से भूमिगत
जांच जैसे- जैसे आगे बढ़ रही है, एक नाम तेजी से सुर्खियों में है वो नाम हरिदत्त तिवारी उर्फ़ भोला तिवारी का है. डीलरों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर यह सामने आया है कि भोला तिवारी पीडीएस खाद्यान्न का कुख्यात माफिया है, जिसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है. सूत्रों के अनुसार, भोला तिवारी पहले एक राशन डीलर था, लेकिन कालाबाजारी और अनियमितताओं के आरोप में उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था. इसके बाद उसने सूचना का अधिकार (RTI) कानून का दुरुपयोग कर ब्लैकमेलिंग का धंधा शुरू कर दिया. बताया जाता है कि कोरोना काल में उसने एक महिला डीएसओ अधिकारी को भी ब्लैकमेल करने का प्रयास किया था, जिसके बाद आरआईटी पुलिस ने 2022 में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था.
ब्लैकमेलिंग से खड़ी की स्कॉर्पियो- अफसरों और डीलरों पर था दबदबा
स्थानीय डीलरों के अनुसार, भोला तिवारी ने ब्लैकमेलिंग से हुई कमाई से हाल ही में एक नई स्कॉर्पियो खरीदी थी, हालांकि वाहन किसके नाम पर है, यह अब भी जांच का विषय है. बताया जा रहा है कि उसका प्रभाव जिले के कई प्रखंडों में था और कई अधिकारियों से करीबी संबंध भी थे. सूत्रों के मुताबिक, भोला तिवारी एजीएम अभिषेक हजारा को भी लगातार ब्लैकमेल कर रहा था. वह बिना वेतन सरकारी गोदाम में ‘अवैध कार्यकर्ता’ की तरह सक्रिय रहता था और पीडीएस से जुड़ी कई गड़बड़ियों में उसकी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है. यहां तक कि हाजरा के साथ हुए हादसे के बाद उसने प्रभारी एमओ के साथ मिलकर डीलरों से चंदा वसूली की योजना बनाई थी इसकी भनक मिडिया को लगते ही दोनों सावधान हो गए थे. मिली जानकारी के अनुसार भोला के इशारे पर ही विभागीय अधिकारी अब कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक शर्मा को फसाने की साजिश रच रहे हैं. बुधवार को भोला तिवारी द्वारा यह भ्रम फैलाया गया कि पुलिस अशोक शर्मा को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है ताकि अशोक भूमिगत हो जाए और पुलिस एवं परिजनों का शक अशोक को लेकर गहरा जाए.
अब पुलिस पर सबकी निगाहें- क्या खुलेगा गम्हरिया आगकांड का राज़
अब प्रशासन और पुलिस दोनों की जांच का फोकस इस भयावह आग के साजिशकर्ता और उसके मकसद को उजागर करने पर है. यह मामला केवल सरकारी संपत्ति के नुकसान का नहीं, बल्कि दो लोगों की जान लेने वाली सुनियोजित साजिश का प्रतीत होता है. जिला प्रशासन ने बताया कि भोला तिवारी की पृष्ठभूमि और नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है. स्थानीय डीलरों और आम लोगों में चर्चा है कि यदि पुलिस ने निष्पक्ष जांच की, तो यह मामला पूरे पीडीएस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर सकता है.
इस घटना से सम्बंधित एक और सनसनीखेज खुलासा अगले अंक में जरूर पढ़े. क्रमशः….

