सरायकेला/ Pramod Singh जिले के कुकड़ू प्रखंड से सामने आया यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी योजनाओं में भारी गड़बड़ी की चौंकाने वाली तस्वीर पेश करता है. राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत यहां मुर्दे भी पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से वृद्धा पेंशन उठा रहे हैं.

कुकड़ू प्रखंड की ओड़िया पंचायत में सोशल ऑडिट के दौरान खुलासा हुआ कि पंचायत में 61 ऐसे लाभुक हैं, जिनकी मौत 2 से 3 साल नहीं, बल्कि 7 से 8 साल पहले ही हो चुकी है, फिर भी उनके बैंक खातों में हर महीने 1000 रुपये की वृद्धा पेंशन भेजी जा रही है. हैरानी की बात यह है कि इन मृत लाभुकों को सितंबर 2025 तक की पेंशन राशि का भुगतान भी कर दिया गया है.
गौरतलब है कि ओड़िया पंचायत डूब क्षेत्र यानी पूर्ण विस्थापित क्षेत्र है, जहां वर्षों पहले मृत हो चुके लोगों के नाम आज भी सरकारी रिकॉर्ड में जीवित हैं. सोशल ऑडिट के दौरान 25 से 27 नवंबर के बीच ग्रामसभा में बताया गया कि पंचायत में कुल 334 लोग पेंशन का लाभ ले रहे हैं, जिनमें 321 वृद्धा और 13 विधवा पेंशनधारी शामिल हैं. इनमें से 61 वृद्धा पेंशनधारी ऐसे हैं, जो इस दुनिया में हैं ही नहीं.
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब ग्रामसभा में इन लाभुकों को पहले ही मृत घोषित किया जा चुका है, तो फिर विभागीय स्तर पर नाम सूची से क्यों नहीं हटाया गया. क्या यह केवल लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल की ओर इशारा करता है. यह भी जांच का विषय है कि मृतकों के खातों में भेजी गई राशि यूं ही पड़ी है या किसी के द्वारा निकाली जा रही है.
इस पूरे मामले ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की पारदर्शिता, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि समय रहते सोशल ऑडिट नहीं होता, तो शायद यह घोटाला यूं ही चलता रहता.
मामले पर सामाजिक सुरक्षा कोषांग की पदाधिकारी निवेदिता रॉय ने कहा है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लाभुकों से राशि की वसूली की जाएगी. हालांकि अब सवाल यह भी है कि जिन लाभुकों की मौत हो चुकी है, उनसे वसूली कैसे होगी और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी.

