सरायकेला: झारखंड निकाय चुनाव का शोर थम चुका है. सोमवार को राज्य के 48 निकाय क्षेत्रों में मतदान होना है. सरायकेला जिले के आदित्यपुर नगर निगम, कपाली नगर परिषद और सरायकेला नगर पंचायत में भी वोट डाले जाएंगे. प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं और प्रत्याशी अब मौन समर्थन जुटाने में लगे हैं.

चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सक्रिय रहे. आदित्यपुर में रोड शो ने माहौल को पूरी तरह चुनावी रंग दे दिया. हालांकि जमीनी स्तर पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को विरासत में मिले कार्यों और अंत तक जारी बगावत का सामना करना पड़ा. स्थानीय विधायक की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी रही.
वहीं झामुमो- कांग्रेस- राजद गठबंधन में बिखराव साफ दिखा. तीनों दलों के बीच तालमेल की कमी प्रचार में झलकती रही. सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ. जिलाध्यक्ष राज बागची अपनी पहली बड़ी संगठनात्मक परीक्षा में असफल नजर आए. आदित्यपुर में प्रत्याशी चयन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही. विक्रम किस्कू की दावेदारी निरस्त होने के बाद मजबूरी में रमेश बालमुचू को समर्थन देना पड़ा. इससे संगठन की रणनीतिक कमजोरी उजागर हुई.
सरायकेला नगर पंचायत में कांग्रेस प्रत्याशी तक नहीं दे सकी और अंततः राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव को समर्थन देकर अपने कैडर को स्पष्ट दिशा नहीं दे पाई. कपाली में भी बगावत और अंदरूनी खींचतान के कारण जमीनी कार्यकर्ता सक्रिय नहीं दिखे. नगर अध्यक्ष अपने पारिवारिक चुनाव में व्यस्त रहे. कुल मिलाकर कांग्रेस जिला स्तर पर संगठनात्मक रूप से बिखरी हुई नजर आई.
दूसरी ओर झामुमो पूरी ताकत के साथ मैदान में डटा है और तीनों निकायों में उसके समर्थित प्रत्याशी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं. मौजूदा हालात में सीधी टक्कर झामुमो और भाजपा समर्थित प्रत्याशियों के बीच सिमटती दिख रही है. आदित्यपुर में त्रिशंकु परिषद की भी संभावना जताई जा रही है. अब देखना होगा कि जनादेश किसके पक्ष में जाता है और किसकी रणनीति सफल साबित होती है.

