सरायकेला: जिले में हाल ही में हुए बड़े कांड के बावजूद खाद्य आपूर्ति विभाग अब तक पूरी तरह सचेत नहीं हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चाण्डिल के डीएसडी अभिकर्ता द्वारा राशन डीलरों से कांड्रा टोल टैक्स का पैसा वसूला जा रहा है. साथ ही गेहूं और चावल का वजन भी निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर बड़े कांटे पर कराया जा रहा है, जबकि नियमतः राशन दुकानों पर ही गाड़ी के कांटे से वजन कर अनाज की आपूर्ति की जानी चाहिए.

बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल एक ब्लैक लिस्टेड व्यक्ति नरेंद्र तिवारी के इशारे पर संचालित हो रहा है. नरेंद्र तिवारी पूर्व में गम्हरिया में विनोद प्रधान के नाम पर डीएसडी का काम खुद कर रहा था. गोदाम में शराब पीने के आरोप के बाद विनोद प्रधान को हटाकर श्याम लाल अग्रवाल उर्फ़ सांवरिया सेठ को डीएसडी का कार्य सौंपा गया, लेकिन इसके बावजूद नरेंद्र तिवारी अब भी सक्रिय बताया जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक नरेंद्र तिवारी गम्हरिया प्रखंड के राशन दुकानदारों से संपर्क कर खुद ही खाद्यान्न भेजने का निर्देश दे रहा है. एक ब्लैक लिस्टेड व्यक्ति का प्रतिदिन चाण्डिल खाद्यान्न गोदाम में मौजूद रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है. रविवार को भी उसकी उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे संदेह और गहरा गया है.
खाद्यान्न की कालाबाजारी में कांड्रा के एक डीलर, रमेश पंडित, किशोर गुप्ता और नरेश कुमार जैसे राशन दुकानदारों के शामिल होने की भी चर्चा है. अंदरखाने की जानकारी के अनुसार नरेश कुमार एक दलाल डीलर से मिलीभगत कर एसआईओ पर हस्ताक्षर कराने के लिए दुकानदारों के पास जा रहा है. इसके साथ ही तय क्षमता से अधिक वजन लादकर खाद्यान्न ढुलाई का अवैध खेल एक बार फिर तेज हो गया है.
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले गम्हरिया स्थित जेएसएफसी गोदाम में हुए भीषण अग्निकांड में एजीएम अभिषेक हाजरा और उनके सहयोगी राजू सेनापति की झुलसकर मौत हो गई थी. मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन इसी बीच खाद्यान्न माफियाओं ने दोबारा अपना नेटवर्क सक्रिय कर लिया है. अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग इस पर कब तक सख्त कार्रवाई करता है, या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा.

