सरायकेला/ Pramod Singh

श्री जगन्नाथ मंदिर सरायकेला के प्रांगण में चल रहे पंचदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सह ज्ञान यज्ञ का तृतीय दिवस सोमवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए. पंडित रत्नाकर नायक जी महाराज ने अपनी वाणी से भक्तों को वामन अवतार और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद की कथा का रसपान कराया. उन्होंने बताया कि जब देवता असुरों से पराजित हुए, तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर देवताओं की रक्षा की.
कथा के दौरान उन्होंने प्रहलाद भगत की भक्ति भावना का भी वर्णन किया. पंडित नायक जी ने कहा कि प्रहलाद को मां के गर्भ में ही भक्ति का संस्कार मिला था, जिसके कारण वे बचपन से ही विष्णु भक्ति में लीन रहे. हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद उनकी आस्था डगमगाई नहीं. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भागवत कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में भक्ति भाव उत्पन्न होता है और उसका जीवन धन्य हो जाता है.

इस अवसर पर श्री जगन्नाथ सेवा समिति सरायकेला के तत्वावधान में राजा सिंहदेव, सचिव पार्थसारथी दाश, कोषाध्यक्ष शंकर सतपथी, बादल दुबे, सुशांत महापात्र, चिरंजीवी महापात्र, श्रीमती चित्रा पटनायक, सुदीप पट्टनायक, चन्द्र शेखर कर, प्रशांत महापात्र, राजेश मिश्रा, गणेश सतपथी, परशुराम कबि, सुमित महापात्र, सीपु महांती, दिपेश रथ, तुषार दुवे, रीता दुवे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समिति के सदस्य उपस्थित थे. मंदिर के पुजारी पंडित ब्रह्मानंद महापात्र और पंडित घासी सतपथी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष भूमिका निभाई.

