जमशेदपुर: नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय की ओर से 11 और 12 नवंबर को विश्वविद्यालय परिसर में दो दिवसीय पुस्तक मेले का सफल आयोजन किया गया. इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और पुस्तक प्रेमियों के बीच पठन-पाठन और ज्ञान संवर्द्धन की संस्कृति को प्रोत्साहित करना था.

मेले में सीबीएस पब्लिशर्स और जेपी पब्लिकेशन्स सहित कई प्रसिद्ध प्रकाशकों ने अपने नवीनतम शैक्षणिक और व्यावसायिक पुस्तकों का प्रदर्शन किया. विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और पुस्तक प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया.
*पुस्तकें ज्ञान और कल्पना का सबसे शक्तिशाली स्रोत हैं: प्रो. प्रभात कुमार पाणि*
पुस्तक मेले का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रभात कुमार पाणि और कुलसचिव नागेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया. कार्यक्रम की शुरुआत में पुस्तकालयाध्यक्ष सविता हृदय ने स्वागत भाषण देते हुए ऐसे आयोजनों को शैक्षणिक माहौल के लिए अत्यंत उपयोगी बताया.
कुलपति प्रो. पाणि ने अपने संबोधन में कहा कि “पुस्तकें ज्ञान और कल्पना का सबसे शक्तिशाली स्रोत हैं. इस डिजिटल युग में, जहाँ जानकारी मात्र एक क्लिक दूर है, मुद्रित पुस्तकों का महत्व अब भी अमूल्य है. प्रत्येक छात्र को पाठ्यक्रम से परे पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए और पुस्तकों के माध्यम से दुनिया को समझने की कोशिश करनी चाहिए.”
कुलसचिव नागेंद्र सिंह ने कहा कि “ऐसे आयोजन न केवल शैक्षणिक जिज्ञासा को बढ़ाते हैं बल्कि विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की नवीनतम प्रगतियों से जोड़ने का अवसर भी देते हैं. मैं सीबीएस और जेपी पब्लिशर्स को उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद देता हूँ और पुस्तकालय टीम को उनके समर्पण के लिए बधाई देता हूँ.”
मेले में चिकित्सा, फार्मेसी, नर्सिंग, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और मानविकी जैसे विषयों की विविध पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया. छात्रों और शिक्षकों ने प्रकाशकों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया और नई शैक्षणिक सामग्री का अवलोकन किया.
दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन पुस्तकालयाध्यक्ष सविता हृदय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. उन्होंने कुलपति, कुलसचिव, संकाय सदस्यों, प्रकाशकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया. इस आयोजन में पुस्तकालय अधिकारियों धीरज कुमार, आरती सिंह, कुमारी आरती और खुशबू की भूमिका सराहनीय रही.
नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में आयोजित यह पुस्तक मेला न केवल अध्ययन की संस्कृति को सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ बल्कि विश्वविद्यालय की निरंतर सीखने और बौद्धिक विकास की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.

