रांची: प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और झारखंड में एक करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल उर्फ आकाश ने गुरुवार को कोलकाता STF के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. असीम मंडल को तिमिर, मनोज, दीपक और राकेश समेत कई अन्य नामों से भी जाना जाता रहा है. ताजा रिपोर्ट में उसके आत्मसमर्पण की पुष्टि की गई है.


असीम मंडल मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला बताया जाता है. झारखंड सरकार ने उसपर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, जबकि रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा में उस पर 1.20 करोड़ रुपये का इनाम था. इस तरह दोनों राज्यों की घोषित राशि को मिलाकर उस पर 2.20 करोड़ रुपये का इनाम बताया गया है. उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 55 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है.
सारंडा-कोल्हान में लंबे समय तक रहा सक्रिय
असीम मंडल लंबे समय तक सारंडा और कोल्हान के जंगलों में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा प्रमुख चेहरा रहा. हाल के महीनों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और संगठन के कई सदस्यों के आत्मसमर्पण के बाद उसके अलग-थलग पड़ने की खबरें सामने आ रही थीं. चार दिन पहले तक सुरक्षा एजेंसियां उसके ठिकाने की तलाश में थीं.
झारखंड में हाल के माओवादी विरोधी अभियानों में संगठन को कई बड़े झटके लगे हैं. जनवरी 2026 में सारंडा के विशेष अभियान में एक करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत 15 माओवादी मारे गए थे.
पहले दस्ते के तीन सदस्यों ने किया था सरेंडर
असीम मंडल के आत्मसमर्पण से पहले उसके दस्ते से जुड़े तीन इनामी माओवादियों ने भी पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. इनमें 15 लाख रुपये का इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी और 10 लाख की इनामी मीता उर्फ नयनतारा तथा एक अन्य महिला कैडर शामिल थीं. इन आत्मसमर्पणों के बाद असीम मंडल पर सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें टिकी थीं. कुछ दिन पहले ही उसके जंगल छोड़ने और अपने सशस्त्र दस्ते को भंग करने की खबर भी सामने आई थी. अब उसके आत्मसमर्पण को झारखंड- पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है.

