मधुपुर/ Md. Aslam भारत सरकार द्वारा संचालित एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर इमारत-ए-शरिया की ओर से झारखंड के देवघर जिले में जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान को तेज कर दिया गया है. इसी क्रम में सलगड़िया गांव और मधुपुर शहर स्थित दारुल-क़ज़ा में व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता इमारत-ए-शरिया के सहायक नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी ने की.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी ने कहा कि एसआईआर केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, आपसी सहयोग और नागरिक जिम्मेदारी की कसौटी है. उन्होंने आशंका जताई कि जिस प्रकार असम में एसआईआर आगे चलकर एनआरसी का आधार बना, उसी तरह की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में सभी नागरिकों को आपसी सहयोग के साथ सतर्क रहने की आवश्यकता है.
उद्घाटन सत्र में मुफ़्ती इकरामुद्दीन क़ासमी ने संगठित, अनुशासित और सामूहिक जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला. वहीं मौलाना डॉ. हिफ़्ज़ुर्रहमान हफ़ीज़ ने वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं, बल्कि हमारी अपनी लापरवाही होती है. क़ाज़ी-ए-शरिया मधुपुर मौलाना इमरान क़ासमी ने एसआईआर की कानूनी और सामाजिक अहमियत बताते हुए जन-सहभागिता को अनिवार्य बताया.
प्रशिक्षण सत्र में मुफ़्ती क़यामुद्दीन क़ासमी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से एसआईआर और पैरेंटल मैपिंग की तकनीकी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. प्रतिभागियों ने मौके पर ही प्रैक्टिकल अभ्यास कर प्रक्रिया को समझा, जिससे जमीनी स्तर पर कार्य करने में सुविधा मिलेगी.
कार्यशाला के दौरान युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे एसआईआर प्रक्रिया के दौरान घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे, आवश्यक दस्तावेजों में सहयोग करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी गरीब या बेसहारा नागरिक प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण वंचित न रहे. कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, वार्ड काउंसलरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी रही.

