मधुपुर/ Md. Aslam

प्रखंड के बुढ़ीबगीचा गांव में 28 दिसंबर को बिजली विभाग की टीम पर ग्रामीणों द्वारा किए गए कथित जानलेवा हमले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस घटना के बाद विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मी 30 दिसंबर को मंत्री आवास पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे मामले को लेकर मंत्री प्रतिनिधि शब्बीर हसन अंसारी के समक्ष विभाग का पक्ष स्पष्ट रूप से रखा.
इसी दौरान बुढ़ीबगीचा गांव के ग्रामीण भी मंत्री आवास पहुंचे. दोनों पक्षों की बात सुनी गई, लेकिन किसी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी.
विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता रोहित मांझी ने बताया कि 29 दिसंबर को कुछ लोग मंत्री हफीजुल हसन के आवास पर पहुंचे थे और विभाग पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. विभाग का कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत, तथ्यहीन और बेबुनियाद हैं.
विभाग ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोप, जैसे अवैध रूप से पैसा लेने, छेड़खानी करने या जबरदस्ती करने के संबंध में अब तक कोई भी ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. एक महिला द्वारा मिस्त्री पर जबरदस्ती का आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन विभाग ने सवाल उठाया है कि इस आरोप का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है. किसने, कब और कहां क्या किया, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है.
विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी पर भी आरोप लगाया जा सकता है, लेकिन कानून सबूत के आधार पर ही कार्रवाई करता है. बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों के जरिए विभाग और उसके कर्मियों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है.
विभाग ने दो टूक कहा कि उनकी टीम पूरी तरह निर्दोष है और गांव के कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर सरकारी कर्मियों पर जानलेवा हमला किया गया, जो न सिर्फ निंदनीय है बल्कि कानून का गंभीर उल्लंघन भी है. इस घटना से विद्युत विभाग के कर्मियों में भारी आक्रोश है.
अधिकारियों ने कहा कि विभाग किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटेगा और जो भी सच्चाई होगी, वह कानून के तहत सामने आएगी. लेकिन बिना सबूत के आरोप लगाना और सरकारी कर्मियों पर हमला करना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल विद्युत विभाग अपने रुख पर अडिग है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है.

