KANDRA Bipin Varshney औद्योगिक क्षेत्र कांड्रा में बढ़ता प्रदूषण अब सिर्फ इंसानों की सेहत तक सीमित नहीं रहा. इसका असर धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. भगवान भोलेनाथ को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र तक धूल और राख की मोटी परत से ढकते नजर आ रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और उड़ती राख वातावरण को लगातार प्रदूषित कर रही है. सुबह और शाम के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं. आसपास के घरों की छतों, दीवारों और पेड़-पौधों पर धूल जमना आम बात हो गई है. बेल के पेड़ों की पत्तियों पर जमी परत यह संकेत देती है कि प्रदूषण किस स्तर तक पहुंच चुका है. श्रद्धालु जब पूजा के लिए बेलपत्र तोड़ते हैं तो पहले उन्हें साफ करना पड़ता है. यह स्थिति क्षेत्र की गंभीर पर्यावरणीय समस्या को उजागर करती है.

स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार संबंधित विभागों से शिकायत की गई, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं दिखी. लोगों का सवाल है कि आखिर कब तक वे और प्रकृति इस जहरीली हवा को सहते रहेंगे. प्रदूषण को लेकर Jharkhand State Pollution Control Board की भूमिका पर भी प्रश्न उठने लगे हैं. यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है.
क्या कहते हैं लोग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमित निरीक्षण, धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है. उनका मानना है कि स्वच्छ हवा हर नागरिक का अधिकार है और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रशासन को अब निर्णायक कदम उठाने चाहिए. अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और कांड्रा के लोगों को प्रदूषण से कब राहत मिलेगी.

