सरायकेला: झारखंड में एक बार फिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला होने का गंभीर मामला सामने आया है. सरायकेला जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिओम नगर 6 एलएफ में शुक्रवार को पत्रकार अंकित शुभम पर उनके पड़ोसी सुभाष यादव ने मामूली विवाद में जानलेवा हमला कर दिया. इस घटना में पत्रकार अंकित शुभम गंभीर रूप से घायल हो गए.

स्थानीय लोगों के अनुसार गाड़ी पार्किंग को लेकर हुए विवाद के दौरान सुभाष यादव आपा खो बैठे और पत्रकार अंकित शुभम पर चार पहिया वाहन चढ़ाने का प्रयास किया. किसी तरह अंकित ने खुद को बचाया, लेकिन इसके बाद आरोपी ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी. बीच-बचाव करने पहुंचे अंकित के पिता और बहन पर भी सुभाष यादव और उनके परिजनों ने हमला कर दिया, जिससे पूरा परिवार दहशत में आ गया.

सूचना मिलने पर आदित्यपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल पत्रकार को इलाज के लिए अस्पताल भेजा. फिलहाल अंकित शुभम की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि घटना के बाद से मुख्य आरोपी सुभाष यादव फरार बताया जा रहा है. पीड़ित परिवार दिनभर थाना का चक्कर काटता रहा, लेकिन देर शाम तक आरोपी पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुआ, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं.
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर झारखंड में पत्रकार कब तक असुरक्षित रहेंगे. लोकतंत्र के प्रहरी कहे जाने वाले पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमले न केवल कानून- व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए भी खतरे की घंटी हैं. घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश है. घटना की सूचना मिलते ही प्रेस क्लब के अध्यक्ष मनमोहन सिंह, महासचिव प्रमोद सिंह, पूर्व महासचिव और संरक्षक रमजान अंसारी, उपाध्यक्ष सुमित सिंह, रणवीर मौर्य, सचिन कुमार, परमेश्वर गोराई सहित कई पत्रकार आदित्यपुर थाना पहुंचे और प्रभारी से मुलाक़ात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. थाना प्रभारी विनोद तिर्की ने भरोसा दिलाया कि पत्रकारों के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. पीड़ित पत्रकार द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज कर सुसंगत धाराओं के तहत FIR दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच जारी है. अब देखना यह है कि पुलिस कब तक आरोपी को गिरफ्तार कर पत्रकारों के भरोसे को कायम रख पाती है.
सुभाष यादव की दबंगई से कॉलोनीवासी आतंकित
स्थानीय लोगों ने बताया कि सुभाष यादव आए दिन पड़ोसियों के साथ किसी न किसी बात को लेकर विवाद करता रहता है. बताया जाता है कि उसे एक स्थानीय सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त है. घटना के बाद कुछ सफेदपोशो ने पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया था, मगर पत्रकारों के रुख को देखते हुए थाना से बैरंग लौट गए. हालांकि पर्दे के पीछे से मामले को रफा- दफा करने का प्रयास जरूर किया मगर नाकाम रहे.

