रांची: करीब सात साल बाद झारखंड में हो रहे निकाय चुनाव अब अंतिम चरण में पहुंच गए हैं. 23 फरवरी को मतदान होना है जबकि 27 फरवरी को मतगणना के बाद शहरों की नई सरकार का गठन हो जाएगा.

निकाय चुनाव को लेकर इस बार कई विवाद भी सामने आए हैं. हालांकि झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य में चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि चुनाव परिणाम पूर्व से ही प्रभावित किए जाने की आशंका है.
राज्य में औपचारिक रूप से दलगत आधार पर चुनाव नहीं हो रहा है. इसके बावजूद विभिन्न राजनीतिक दल अपने समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं. सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ सरकारी कर्मियों को कथित रूप से विशेष निर्देश दिए गए हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पदाधिकारी के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्टों में ऐसे संकेत दिए गए हैं. इन चर्चाओं के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
गौरतलब है कि विपक्ष पहले से ही वोटर लिस्ट, ट्रिपल टेस्ट और रोस्टर सिस्टम के तहत सीटों के परिसीमन को लेकर सवाल उठाता रहा है. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद अब निगाहें मतदान और मतगणना प्रक्रिया पर टिकी हैं. राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को चुनाव आयोग के दिशा- निर्देशों के तहत सतर्क रहकर प्रक्रिया पर नजर बनाए रखने की जरूरत बताई जा रही है.
फिलहाल इन चर्चाओं के बीच चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने का भरोसा दोहराया गया है. ऐसे में निकाय चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है. साथ ही सरकारी पदाधिकारियों के गतिविधियों पर भी पैनी निगाह रखनी होगी.

