जमशेदपुर/ Rasbihari Mandal माताजी आश्रम, हाता में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22वां वार्षिक उत्सव महालया के पावन अवसर पर भव्यता और विविध कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ. सुबह 9:30 बजे मां दुर्गा की आगमनी गीत से उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें सुनील कुमार दे, कमल कांति घोष, रेवा गोस्वामी, तोड़ित मंडल, भास्कर दे, पतित पावन दास और प्रवीर दास समेत कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी.


सुबह 10:30 बजे शुरू हुए पहले सत्र का उद्घाटन अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया. स्वागत गीत कमल कांति घोष ने प्रस्तुत किया जबकि स्वागत भाषण परिषद के सचिव शंकर चंद्र गोप ने दिया. इस अवसर पर झारखंड प्रभा के संपादक सुनील कुमार दे ने पत्रिका की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. “साहित्य समाज का दर्पण” विषय पर अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए. मुख्य अतिथि ने झारखंड प्रभा को भाषाई एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह पत्रिका सभी भाषाओं को उचित सम्मान दिलाने का कार्य कर रही है.

कार्यक्रम में झारखंड प्रभा के 17वें अंक तथा साहित्यकार विकास कुमार भकत की अंग्रेजी पुस्तक ‘अनफॉरगेटबुल मेमोरीज’ का विमोचन किया गया. परिषद की ओर से शिक्षाविद माणिक लाल महतो, साहित्यकार वीरेंद्र नाथ घोष और दिव्यांग संगीत कलाकार तरणी कांत गोप को सम्मानित किया गया. अध्यक्षीय भाषण रघुनंदन बनर्जी और धन्यवाद ज्ञापन परिषद अध्यक्ष भवतारन मंडल ने दिया.
दूसरे चरण में बहुभाषी कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं. इसमें जनमेजय सरदार, करुणामय मंडल, जयहरि सिंह मुंडा, बासंती सिंह सरदार, चिंतामणि त्रिपाठी, स्वपन मंडल, बलराम गोप सहित अनेक साहित्यकारों और कलाकारों ने भाग लिया. बड़ी संख्या में माताजी आश्रम के भक्तगण और परिषद के सदस्य भी उपस्थित रहे.

