चाईबासा/ Jayant Pramanik पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ मिली बड़ी सफलता के बाद झारखंड की पुलिस महानिदेशक तदशा मिश्रा ने शनिवार को चाईबासा में विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुरक्षा बलों की कार्रवाई को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि सारंडा क्षेत्र बहुत जल्द पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा और यह ऑपरेशन लाल आतंक के अंत की शुरुआत है.

डीजीपी ने बताया कि छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडीह और बहवा इलाके में खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया गया था. 22 और 23 जनवरी की रात तक चली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के शीर्ष दस्ते को बड़ा नुकसान पहुंचाया. उन्होंने कहा कि यह केवल मुठभेड़ नहीं, बल्कि नक्सली संगठन के नेतृत्व ढांचे पर सीधा प्रहार है.
मुठभेड़ में 1 करोड़ के इनामी अनल उर्फ पतिराम मांझी और 25 लाख के इनामी अनमोल समेत कुल 17 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की गई है. इनके अलावा अमित मुंडा, पिंटू लोहरा और लालजीत जैसे सक्रिय नक्सली भी मारे गए हैं. डीजीपी ने बताया कि मौके से AK-47, इंसास राइफल समेत भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है.
तदशा मिश्रा ने कहा कि झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के बीच बेहतर समन्वय और जवानों के साहस के कारण यह सफलता मिली है. उन्होंने नक्सलियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि या तो वे आत्मसमर्पण करें या कानून की सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें.
डीजीपी ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई के बाद सारंडा के दूरस्थ गांवों तक विकास योजनाओं को पहुंचाने का रास्ता और आसान होगा. जिन इलाकों को कभी नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, वहां अब सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. उन्होंने इसे राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट बताया.

