जामताड़ा: इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता और डीलरों के कथित गैर जिम्मेदाराना रवैये को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद जिला परिवहन विभाग ने जामताड़ा जिला मुख्यालय स्थित ई-रिक्शा एवं ई-स्कूटर डीलरों के शोरूम का औचक निरीक्षण किया. जिला परिवहन पदाधिकारी मुकेश कुमार और मोटर यान निरीक्षक बरकत अंसारी ने संयुक्त रूप से विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच की. इस दौरान डीलरों को वाहनों की बिक्री, निबंधन और आवश्यक दस्तावेजों के संधारण को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए.


निरीक्षण के क्रम में अधिकारियों ने डीलरों को मोटरयान अधिनियम, 1988 और मोटरयान नियमावली, 1989 के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक अभिलेख व्यवस्थित रखने का निर्देश दिया. वाहनों की बिक्री से संबंधित संचिका, टैक्स इनवॉइस और बीमा संबंधी कागजात को वर्षवार एवं माहवार पंजियों में दर्ज करने को कहा गया, ताकि भविष्य में पुनर्निरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो सकें. इसके अलावा सभी डीलरों को ट्रेड लाइसेंस बनवाने तथा उसकी अवधि समाप्त होने से पहले नवीनीकरण कराने की हिदायत दी गई.
इन प्रतिष्ठानों का किया निरीक्षण
परिवहन विभाग की टीम ने कंबाइंड बिल्डिंग रोड स्थित सर्किट हाउस के समीप सिवाक्षी शोभा आई मोटर, दुमका रोड के उदलबनी स्थित साहू ऑटो एजेंसी और कटंकी स्थित जामताड़ा-ईवी सहित अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया. इस दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वाहन बिक्री के मामले में ग्राहकों के हितों को सर्वोपरि रखा जाए. वाहनों की बिक्री और निबंधन से संबंधित प्रक्रियाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए.

ई-स्कूटर की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता को लेकर ग्राहक शिकायतें कर रहे हैं. कुछ ग्राहकों ने डीलरों पर वाहन में खराबी आने के बाद जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप भी लगाया है. ऐसे में परिवहन विभाग की इस कार्रवाई को इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. हालांकि, वाहनों की तकनीकी गुणवत्ता की जांच और शिकायतों के निस्तारण को लेकर आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी.
लगातार खबरों के बाद विभाग की पहल
इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता और ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को इंडिया न्यूज वायरल बिहार झारखंड ने प्रमुखता से उठाया था. गत 2 अक्टूबर को चलती ई-बाइक का पिछला चक्का टूटकर अलग होने की घटना को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी. इसमें वाहन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कंपनी और डीलर के खिलाफ कार्रवाई की मांग सामने रखी गई थी. इसके बाद 3 अक्टूबर को ‘ई-बाइक का चक्का टूटा तो हरकत में आया परिवहन विभाग, जांच से खुलेगा तकनीकी खामी का राज’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मामले में परिवहन विभाग की कार्रवाई की जानकारी दी गई थी. इससे पहले 9 सितंबर को मिहिजाम रोड स्थित गायत्री मंदिर के पास एक आवास में इलेक्ट्रिक स्कूटी के जलकर राख होने की घटना को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था.
सिर्फ पंजियों की जांच से नहीं चलेगा काम
परिवहन विभाग द्वारा डीलरों के दस्तावेजों की जांच और लाइसेंस संबंधी निर्देश देना जरूरी है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता से जुड़े सवालों का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए. वाहनों में तकनीकी खामियों, बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की सुरक्षा तथा बिक्री के बाद ग्राहकों को मिलने वाली सेवा की भी जांच होनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों से वाहनों की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी संभावित खतरे की समय रहते पहचान हो सके और ग्राहकों को जिम्मेदार डीलरों एवं कंपनियों से उचित समाधान मिल सके.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

