जामताड़ा: सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, दुमका रोड की ओर से इस वर्ष 38वां शारदीय दुर्गोत्सव मनाया जाएगा. दुमका रोड स्थित दुर्गा मंदिर में होने वाले दुर्गोत्सव की भव्य सजावट और आकर्षक पूजा पंडाल को देखने के लिए श्रद्धालु हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस वर्ष भी समिति की ओर से भव्य पंडाल का निर्माण और आकर्षक सजावट की गई है. यहां के दुर्गोत्सव में जहां भव्यता का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, वहीं सादगी और सौम्यता भी लोगों को आकर्षित करती है.



1988 में हुई थी पूजा की शुरुआत
दुमका रोड में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1988 में हुई थी. उस समय ओपू घोष, सत्यनारायण पोद्दार और शैलेंद्र नाथ मिश्र की अध्यक्षता में पूजा का आयोजन शुरू किया गया था. धीरे-धीरे यह दुर्गोत्सव क्षेत्र की धार्मिक आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया. करीब 14 वर्ष पूर्व श्रद्धालुओं ने आपसी सहयोग और चंदा एकत्र कर दुमका रोड में दुर्गा मंदिर का निर्माण कराया. इसके बाद से मंदिर में पूजा का आयोजन और भी व्यवस्थित तरीके से होने लगा.
बंगाल के मूर्तिकार बनाते हैं मां की प्रतिमा
समिति की धार्मिक परंपरा की एक खास पहचान मां दुर्गा की प्रतिमा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से जुड़ी है. यहां पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले के अलनाडीह गांव के मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण करते हैं. वहीं, कुंडहित प्रखंड के अंबा गांव से ढाक बजाने वाले कलाकार पहुंचते हैं. ढाक की गूंज और पूजा की पारंपरिक विधियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.
समिति के सदस्य जुटे हैं आयोजन की तैयारी में
दुर्गोत्सव के सफल आयोजन को लेकर समिति के पदाधिकारी, सदस्य और श्रद्धालु सक्रिय हैं. श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति, दुमका रोड के अध्यक्ष रवि दुबे, सचिव विजय दुबे और कोषाध्यक्ष प्रदीप केडिया हैं. इसके अलावा दशरथ साव, मुरारी साव, लड्डू बजाज, सत्यनारायण टिबड़ीवाल, सुबोध साव, चंडी चरण दे, अनूप पांडे, बुबाई दुबे, बुम्बा दुबे और संजय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में मां के भक्त आयोजन में सहयोग कर रहे हैं. समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रयास से दुमका रोड का दुर्गोत्सव हर वर्ष आकर्षण का केंद्र बनता है.
रिपोर्ट: मनीष बरनवाल

