जमशेदपुर: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव का परिणाम आने के बाद भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन के पिता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने अपनी पहली प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि झारखंड में उनकी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि बदलती डेमोग्राफी, अवैध घुसपैठ, धर्मांतरण और आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा तथा अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है.

उन्होंने कहा कि यह मार्ग आसान नहीं है और इसमें कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन वे संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे. चंपाई सोरेन ने घाटशिला क्षेत्र के सभी समर्थकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि संभवतः इस बार वे जनता को अपनी बात पूरी मजबूती से समझा नहीं सके.
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि. “चुनाव आते-जाते रहेंगे, जीत-हार होती रहेगी, लेकिन हमारा समाज बचना चाहिए. आदिवासियत बची रहनी चाहिए, तभी झारखंड बचेगा.”
उन्होंने आगे कहा कि पाकुड़, साहिबगंज सहित कई जिलों में आदिवासी समाज का अल्पसंख्यक हो जाना गंभीर चिंता का विषय है. यदि भूमिपुत्रों की जमीन, संस्कृति और बेटियों की अस्मिता की रक्षा नहीं हो सकी, तो वही असली हार होगी.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन, धर्म और संस्कृति की सुरक्षा के लिए उनका संघर्ष हमेशा जारी रहेगा. जब-जब आदिवासी अधिकारों पर चोट होगी, वे हर बार विरोध के लिए खड़े रहेंगे. अंत में चंपाई सोरेन ने “जय झारखंड.” कहकर अपनी प्रतिक्रिया समाप्त की.

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