गम्हरिया: पिछले दिनों राज्य सरकार के निर्देश पर करीब एक महीने तक राज्य के सभी पंचायतों में “आपके अधिकार- आपकी सरकार- आपके द्वार” कार्यक्रम चलाया गया सरकार ने इसे जहां पूरी तरह सफल बताया वहीं विपक्ष लगातार इस मामले पर सरकार को घेरती रही.


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सरकार ने दावा किया, कि लाखों आवेदनों का निस्तारण किया गया. प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बढ़- चढ़कर सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने में कड़ी मशक्कत की. मगर जमीनी हकीकत जान आप हैरान हो जाएंगे. सरायकेला जिले के गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा मिलने वाली बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन पिछले 4 माह से उनके खाते में नहीं डाली गई. बुजुर्ग बैंकों और डाकघरों और सरकारी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं. जहां सरकार की ओर से मिलने वाला वृद्धावस्था पेंशन विगत 4 माह से प्रखंड क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल रहा है. पेंशन कब आएगा यह किसी को पता नहीं है. सरकार की तरफ से बुजुर्गों, दिव्यांगों विधवाओं और बेसहारा लोगों को हर महीने एक हजार रुपए पेंशन दी जाती है. इस पेंशन से वे अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं. बता दें कि पेंशनधारियों को मिलने वाले पैसे उनके लिए सहारा बनती है. पेंशन अक्सर तय समय पर नहीं आती है इससे बुजुर्ग काफी परेशान रहते हैं. दर- दर बुजुर्ग एक दूसरे से पेंशन ना आने का कारण पूछते नजर आ रहे हैं. एक बुजुर्ग शंकर चंद प्रमाणिक हर्निया रोग से परेशान हैं. दवा खरीदनी है, पर दवा का पैसा है नहीं लोगों से कुछ पैसा उधार लेकर दवा खरीदने को मजबूर है.
शंकर प्रमाणिक
वहीं विगत 4 महीनों से पेंशन नहीं आने से परेशान सुशीला बेरा नामक महिला ने बताया, कि यदि पेंशन ना मिले तो उनका गुजारा करना मुश्किल हो गया है. मकर पर्व पर एक नया वस्त्र तक नहीं खरीद सकी है. उन्होंने अपनी जो आपबीती बताते हुए सरकार और प्रशासन से फरियाद लगाते हुए कहा चार महीने से पेंशन नहीं मिलने से गुजार चलाना मुश्किल हो गया है. घर में दूसरा कोई कमानेवाला नहीं है. सरकार की ओर से मिलनेवाले पेंशन से ही गुजर- बसर चलता है.
बुजुर्ग महिला सुशीला बेरा
वैसे इस संबंध में जब बीडीओ से जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया. ऐसे में कैसे समझ लिया जाए कि सरकार के महत्वाकांक्षी योजना “आपके अधिकार- आपकी सरकार- आपके द्वार” पूरी तरह से राज्य में सफल रही. हम सरकार की नीयत पर सवाल नहीं उठाते, मगर समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों को योजनाओं का लाभ कैसे मिले इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.
