चाईबासा/ Jaynat Pramanik चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में नवजात की मौत के बाद सामने आई अमानवीय घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है. कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम की पत्नी रीता तिरिया ने अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद नवजात की मौत हो गई.

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण बच्चे की जान नहीं बच सकी. दुखद बात यह रही कि अस्पताल प्रबंधन ने मृत नवजात को घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई. मजबूर होकर पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम को अपने ही बच्चे के शव को एक कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा.
इस घटना पर पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि यह घटना झारखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी चाईबासा सदर अस्पताल से एक पिता को अपने बच्चे के शव को थैले में ले जाते देखा गया था, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया.
गीता कोड़ा ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में सांसद, विधायक और मंत्री सभी सत्ताधारी दल से होने के बावजूद अस्पतालों की स्थिति बेहद खराब है. अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. कई मरीजों का इलाज जमीन पर किया जाता है और गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच के लिए घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ता है.
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार डॉक्टर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते, जिससे मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है. चाईबासा और चक्रधरपुर क्षेत्र के लोगों को खून की जरूरत होने पर जमशेदपुर जाना पड़ता है क्योंकि यहां का ब्लड बैंक अब तक चालू नहीं किया गया है.
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि आदिवासी और गरीब परिवारों के साथ सरकारी अस्पतालों में उपेक्षा और भेदभाव किया जा रहा है. उन्होंने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि अस्पतालों की व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाए ताकि भविष्य में किसी गरीब और आदिवासी परिवार को ऐसी पीड़ा और अपमान का सामना न करना पड़े.

