दरभंगा: जिले के जाले प्रखंड में सरकारी ज़मीन को अवैध तरीके से अडानी एग्रो लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज करने का मामला सामने आया है. बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत दर्ज अपील पर सुनवाई करते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव/ प्रधान सचिव ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया है. मौजा जाले के थाना संख्या 10, खाता संख्या 5741 और खेसरा संख्या 4405 की 103 डिसमिल ज़मीन राजस्व अभिलेख में “किस्म– रास्ता, अनाबाद सर्व साधारण” दर्ज थी, जिसे तत्कालीन अंचल अधिकारी ने नियमों की अनदेखी कर अडानी एग्रो लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के नाम पर दर्ज कर दिया था. जांच में यह बात सामने आई कि यह भूमि सड़क के रूप में सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद थी.

अपर समाहर्ता दरभंगा ने जांच पूरी कर अवैध जमाबंदी को रद्द कर दिया. कंपनी को अपील का अवसर दिए जाने के बावजूद उसने कोई अपील दाखिल नहीं की. फिलहाल यह मामला समाहर्ता दरभंगा के न्यायालय में लंबित है.राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिला पदाधिकारी दरभंगा को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर दोषी तत्कालीन अंचल अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए प्रपत्र क गठित कर भेजा जाए और जिसने सरकारी भूमि को ‘केवाला’ के माध्यम से बेचा, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए. यह आदेश 12 सितंबर 2025 को जारी हुआ है जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार अब सरकारी ज़मीन की अवैध बिक्री और फर्जी जमाबंदी मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है.
समाजसेवी केशव कुमार ने कहा कि हमारी लड़ाई जारी रहेगी और ऐसे भू-माफिया व भ्रष्ट अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. यह मामला अब दरभंगा समेत पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है.

