चाईबासा/ Jayant Pramanik घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर कुड़मी समाज ने बड़ा ऐलान किया है. रविवार को गालुडीह में आयोजित घाटशिला विधानसभा स्तरीय बैठक में समाज ने केंद्र और राज्य सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. समाज ने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो घाटशिला उपचुनाव में वोट का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा.

बैठक में समाज के सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पिछले 75 वर्षों से कुड़मी समाज भारतीय संविधान का सम्मान करते हुए मतदान करता आ रहा है, लेकिन अब तक किसी भी सरकार ने समाज के संवैधानिक अधिकारों और मांगों को गंभीरता से नहीं लिया. समाज ने आरोप लगाया कि सरकारें बार-बार वादे करती हैं लेकिन कोई ठोस पहल नहीं होती.
कुड़मी समाज ने कहा कि वर्ष 2022, 2023 और 2025 में लगातार रेल टेका आंदोलन के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने उनकी मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया. उन्होंने कहा कि समाज के मांग पत्र “टेबल से टेबल” घूम रहे हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा.
इसलिए समाज ने फैसला लिया कि घाटशिला विधानसभा के सभी महतो बहुल 105 पोलिंग बूथों में लगभग 30 से 40 हजार कुड़मी मतदाता इस उपचुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे. समाज की अगली निर्णायक बैठक गालुडीह इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास आयोजित की जाएगी.
आंदोलनकारी अमित महतो ने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार 10 दिनों के भीतर कुङमी समाज को एसटी सूची में शामिल करने, कुङमाली भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ने और सरना धर्म कोड की मांगों पर कार्रवाई शुरू नहीं करतीं, तो समाज विधानसभा स्तर पर वोट बहिष्कार के लिए विवश होगा.
उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ नेतृत्व और ग्राम प्रधानों से भी बातचीत चल रही है ताकि यह बहिष्कार ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली हो. वहीं खोकन महतो ने कहा कि यदि स्थिति नहीं बदली तो भविष्य के किसी भी चुनाव में समाज मतदान नहीं करेगा.
बैठक में आंदोलनकारी अमित महतो, समाजसेवी मानिक महतो, आदित्य कुमार, मनोज महतो, दीपक महतो, खोकन महतो, खुदीराम महतो, विश्वनाथ महतो, दीनबंधु महतो और रखोहोरी महतो सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे.

