दरभंगा: जिले के जाले प्रखंड में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हुई भारी अनियमितताओं को लेकर हंगामा तेज हो गया है. विधानसा चुनाव पूर्व जिन लाभुकों के खातों में ₹10,000 की राशि भेजी गई थी, अब उन्हीं लोगों विभाग द्वारा पैसे लौटाने का नोटिस थमाया जा रहा है. इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

स्थानीय सूत्रों के अनुसार योजना केवल महिलाओं के लिए थी, लेकिन चुनावी समय में बिना उचित सत्यापन के सैकड़ों पुरुषों के खातों में भी राशि भेज दी गई. ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई छोटी गलती नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी है. कई लोगों ने आरोप लगाया है कि “जीविका” से जुड़े स्टाफ और कैडर ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में भी लाभ की राशि डलवाई. प्रक्रिया इतनी लापरवाह थी कि जैसे “आधार डालो और पैसा पाओ” का माहौल बन गया था.
अब जब विभाग पैसे की वसूली कर रहा है, तो पीड़ित ग्रामीण इसे पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही बता रहे हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे ब्लॉक या एरिया लेवल के अधिकारियों से सवाल करते हैं, तो अधिकारी उल्टा बदसलूकी करते हैं और जवाबदेही से बचने की कोशिश करते हैं. इससे लोगों में नाराजगी और भी बढ़ गई है.
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि गलती आखिर किसकी है- उन वोटरों की, जिनके खातों में बिना जानकारी के पैसा भेजा गया, या उन अधिकारियों की, जिन्होंने बिना सत्यापन के राशि ट्रांसफर कर दी. कई लोगों ने इसे चुनावी लाभ बांटने का खेल बताया है, जो अब उजागर होने लगा है.
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषियों की पहचान हो सके और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके. ग्रामीणों का कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के यह पूरी गड़बड़ी दबा दी जाएगी और ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं.
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा से पूर्व सरकार ने महिलाओं क़ो रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लाखों महिला लाभुकों के खाते में दस हजार रूपये भेजे थे. यह सिलिसला पहले चरण के मतदान की शुरुआत के बाद तक कई जिलों में चला और लाभुकों क़ो पैसे दिए गए. इस योजना ने ऐसा धमाल मचाया कि बिहार में एनडीए की धमाकेदार वापसी हुईं. ऐसे में चुनाव पूर्व इतनी बड़ी गलती अब सामने आने के बाद विपक्ष के आरोपों क़ो बल मिल रहा है. वैसे यह मामला केवल एक जिला या प्रखंड का नहीं हो सकता. अगर बारीकी से जांच हो जाए तो एक बड़ा खुलासा सामने आ सकता है और चुनाव में हुए भ्रष्टाचार की पोल खुल सकती है.

