मुंगेर: बिहार विधानसभा चुनाव में मुंगेर जिले की जमालपुर सीट इस बार सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि रिश्तों की जंग का भी केंद्र बन गई है. यहां जदयू के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार और उनके ही रिश्ते में भतीजे नचिकेता मंडल आमने- सामने हैं. दोनों ने शुक्रवार को एक ही सीट से नामांकन दाखिल कर सियासी पारा चढ़ा दिया है.

दरअसल, जदयू ने इस बार टिकट बंटवारे में बड़ा बदलाव करते हुए पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों पर दांव लगाया. इसी क्रम में पूर्व मंत्री शैलेश कुमार का टिकट काटकर पार्टी ने नचिकेता मंडल को प्रत्याशी बनाया. इस फैसले से नाराज होकर शैलेश कुमार ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी.
नामांकन के दिन जमालपुर में माहौल गर्म दिखा. दोनों नेता समर्थकों के साथ अनुमंडल कार्यालय पहुंचे, जहां नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन का सिलसिला चलता रहा. जदयू प्रत्याशी नचिकेता मंडल ने कहा कि “शैलेश कुमार मेरे चाचा समान हैं. मैंने घर जाकर उनका आशीर्वाद लेने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले. युवाओं को मौका देने की बात को उन्हें समझना चाहिए था.”
वहीं, शैलेश कुमार ने पार्टी नेतृत्व पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि “31 साल की निष्ठा के बाद भी पार्टी ने मुझे धोखा दिया. जिसे टिकट दिया गया, वही कभी मुख्यमंत्री पर अभद्र टिप्पणी करता था. अब मैं जमालपुर की जनता के आग्रह पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहा हूं.”
जदयू के अंदरूनी मतभेद पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “चुनाव लड़ना सबका अधिकार है. पार्टी ने अपने स्तर पर निर्णय लिया है. शैलेश कुमार कई बार विधायक बने और मंत्री भी रहे. अब पार्टी ने युवाओं को मौका देने का फैसला किया है, उस पर टिप्पणी करने का कोई मतलब नहीं है.”
जमालपुर की जनता अब इस रिश्तों की सियासी जंग को बड़े ध्यान से देख रही है. एक तरफ 31 साल का अनुभव है, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी की ऊर्जा और बदलाव का वादा. अब फैसला मतदाताओं के हाथ में है कि वे परंपरा को चुनते हैं या परिवर्तन को.

