सरायकेला/ Pramod Singh अर्का जैन विश्वविद्यालय, गम्हारिया के प्रांगण में “त्रिधारा छऊ नृत्य उत्सव” के अंतर्गत पारंपरिक छऊ मुखौटा निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह कार्यशाला भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की पहल पर कलामंदिर संस्था द्वारा आयोजित त्रिधारा छऊ नृत्य उत्सव का हिस्सा रही.

कार्यशाला का संचालन प्रसिद्ध छऊ कलाकार गुरु सुशांत महापात्र एवं सुमित महापात्र ने अपने सहयोगी छात्र रोहित साहू, प्रति पाल और मनीषा पाल के साथ मिलकर किया. इस दौरान विद्यार्थियों को छऊ मुखौटों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रतीकात्मक अर्थ, रंग संयोजन और पारंपरिक निर्माण तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई.

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को छऊ नृत्य की समृद्ध लोक परंपरा से जोड़ना और इस विलुप्त होती कला के संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा. अर्का जैन विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स के छात्रों ने इस अवसर पर छऊ मुखौटा निर्माण की बारीकियों को नजदीक से समझा और व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया.
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि छऊ केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि झारखंड और पूर्वी भारत की सांस्कृतिक पहचान है. ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी में लोककला के प्रति रुचि बढ़ेगी और पारंपरिक कलाओं को नया मंच मिलेगा.

