राजनगर: सरायकेला- खरसावां जिला के राजनगर प्रखंड अंतर्गत साप्ताहिक हाट मैदान में रविवार को आदिवासी सेंगेल अभियान की एक विशेष बैठक हुई. जिसमें मुख्य रूप से आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू उपस्थित थे. इस दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए सालखन मुर्मू ने कहा कि भरतीय संविधान में संथाली भाषा आठवीं अनुसूची में शामिल है. झारखंड एक जनजातीय प्रदेश है. यहां संथाली भाषा को प्रथम राज भाषा का दर्जा मिलना चाहिए. आदिवासी सेंगेल अभियान झारखंड सरकार से संथाली भाषा को प्रथम राजभाषा का दर्जा देने की मांग करती है. इसके लिए पांच प्रदेशों के संथाली समुदायों के लोगों को आगामी 30 अप्रैल 2022 को रांची के मोहराबादी मैदान पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है. साथ ही सरना धर्म कोड के लिए आगामी 30 जून को दिल्ली चलने को आह्वान किया जा रहा है. उन्होंने कहा, कि झारखंड सरकार को संथाली भाषा को हर हाल में प्रथम राज भाषा का दर्जा दिया देना होगा और बाकी 9 भाषाओं को जिसमें 5 आदिवासी भाषा और 4 मूलवासी भाषा है उनको भी सम्मिलित किया जाय. सरना धर्म कोड आदिवासी मूल वासियों को मिले इसके लिए सभी 30 जून 2022 को दिल्ली चलेंगे. बैठक में आदिवासी सेंगेल अभियान के महिला मोर्चा की सुमित्रा मुर्मू, मुख्य संयोजक अम्पा हेम्ब्रम, दुर्गाचरण टुडु, कालीपद टुडु, हड़िया टुडु, पालटन किस्कु, सुशांत टुडु, शांखो टुडु, पोदम टुडु, बासुदेव मुर्मू, खेला मुर्मू आदि शामिल थे.


