आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 2 स्थित टाटा-कांड्रा मुख्य मार्ग के इंडस्ट्रियल एरिया में कथित सिटी सेंटर परिसर में शहरी और इंडस्ट्रियल कचरे के ढेर में लगी आग अब गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है.

गुरुवार को इंडस्ट्रियल वेस्ट में लगी आग ने और भी विकराल रूप धारण कर लिया. दिनभर आदित्यपुर नगर निगम, जियाडा, टाटा स्टील और झारखंड अग्निशमन विभाग आग पर काबू पाने का प्रयास करते रहे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद आग लगातार फैलती रही. इससे प्रशासनिक तैयारियों और समन्वय पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से कचरे के ढेर में आग धधक रही थी, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आग के बीच-बीच में धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है. जहरीले धुएं के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना तो दूर, घरों के अंदर रहना भी मुश्किल हो गया है.
नगर निगम का कहना है कि इंडस्ट्रियल वेस्ट में आग किसी ने जानबूझकर लगाई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र के बीच इस भूखंड में इंडस्ट्रियल कचरा डंप होने की अनुमति किसने दी. निगम अधिकारियों का दावा है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और इसके लिए जियाडा की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
गौरतलब है कि उक्त भूखंड में जियाडा ने कचरा डंप करने पर रोक लगा दी है. इसके बावजूद वहां कचरे का अंबार लगना और उसमें आग लगना पूरे सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है. फिलहाल आदित्यपुर नगर निगम से कचरा उठाव का ठेका नवनिर्वाचित मेयर संजय सरदार की कंपनी के पास है. ऐसे में मेयर बनने के बाद शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था को दुरुस्त करना उनके लिए बड़ी परीक्षा बन गया है.
वर्तमान स्थिति यह है कि आदित्यपुर नगर निगम की कचरा प्रबंधन व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है और कचरे के ढेर में लगी आग पूरे इलाके को प्रदूषण और बीमारी के खतरे में धकेल रही है. यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह आग और उससे निकलने वाला जहरीला धुआं बड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है.
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