आदित्यपुर: नगर निगम के वार्ड 29 में इस बार का पार्षद चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. दिवंगत पार्षद राजमणि देवी की पुत्रवधु अर्चना कुमारी मैदान में हैं और पूरे जोश के साथ चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं. वार्ड की गलियों में डोर-टू-डोर जनसंपर्क अभियान के दौरान उन्हें लोगों का व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है.

अर्चना कुमारी हर वर्ग और समुदाय के लोगों से सीधे संवाद कर रही हैं और वार्ड के विकास को अपनी प्राथमिकता बता रही हैं. प्रचार के दौरान मतदाता दिवंगत राजमणि देवी के कार्यकाल को याद करते हुए कहते हैं कि उन्होंने हमेशा जनता के बीच रहकर समस्याओं का समाधान किया. यही भरोसा अब लोग अर्चना कुमारी पर जता रहे हैं.
वार्ड 29 में उनका सीधा मुकाबला पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रीता श्रीवास्तव से है. चुनावी मैदान में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. भाजपा खेमा अर्चना कुमारी के समर्थन में सक्रिय है और संगठन स्तर पर प्रचार अभियान को तेज किया गया है. दिवंगत राजमणि देवी भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकी थीं और उनके नेतृत्व में संगठन की मजबूत पकड़ मानी जाती थी.
निवर्तमान मेयर से बढ़ी नाराजगी
इस बार निकाय चुनाव में निवर्तमान मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी रीता श्रीवास्तव को वार्ड 29 से मैदान में उतारा है. इसे लेकर भाजपा के अंदरूनी हलकों में असंतोष की चर्चा तेज है. हाल ही में आरआईटी मंडल अध्यक्ष के रूप में निवर्तमान मेयर पुत्र अभिषेक विशाल के नाम की घोषणा के बाद संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी खुलकर सामने आई है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीते पंद्रह वर्षों से मेयर परिवार का नगर निगम की राजनीति में प्रभाव रहा है. इस बार भी अपने वार्ड से पुत्रवधु अमृता श्रीवास्तव को मैदान में उतारने और अन्य वार्डों में समर्थित प्रत्याशी खड़े करने को लेकर विरोध की आवाज उठ रही है. बताया जा रहा है कि उनका लक्ष्य डिप्टी मेयर पद पर भी नजर बनाए रखना है.
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वार्ड 29 में पूर्व में दिवंगत राजमणि देवी ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी. उस समय भी विरोधी खेमे की रणनीति सफल नहीं हो सकी थी. इस बार सीधे मुकाबले में मेयर की पत्नी के उतरने से चुनाव और भी प्रतिष्ठा का बन गया है.
वार्ड की जनता के बीच विकास, उपलब्धता और जनसंपर्क सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि अंदरूनी असंतोष मतदान तक कायम रहा तो इसका असर परिणाम पर पड़ सकता है. कुल मिलाकर वार्ड 29 में यह मुकाबला केवल दो प्रत्याशियों के बीच नहीं बल्कि जनभावना और संगठनात्मक एकजुटता की भी परीक्षा बन गया है.

