आदित्यपुर: औद्योगिक क्षेत्र में 30 करोड़ रुपये की बिजली चोरी से जुड़ा बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, जिस कंपनी पर बिजली चोरी का गंभीर आरोप था और जिस पर एफआईआर दर्ज कर मामला कोर्ट में लंबित है, उसी कंपनी को नाम बदलकर नया बिजली कनेक्शन दे दिया गया है. यह पूरा खेल आदित्यपुर सब डिवीजन-2 में हुआ बताया जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, यह गड़बड़ी जुलाई- अगस्त 2025 के दौरान हुई. इस मामले में सहायक अभियंता, कंप्यूटर ऑपरेटर और बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि जमशेदपुर महाप्रबंधक और अधीक्षण अभियंता को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई.
यह वही कंपनी है, जिसे रघुवर सरकार के कार्यकाल में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान विजिलेंस टीम ने बिजली चोरी के आरोप में पकड़ा था. उस समय इंडक्शन फर्नेस कंपनियों में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी के खुलासे हुए थे. अनिल पाल्टा, जो उस वक्त डीआईजी रैंक के अधिकारी थे, की निगरानी में 2017-18 में हुई जांच में कई कंपनियों पर कार्रवाई की गई थी.

बाद में यह कंपनी बंद हो गई थी और कोर्ट में दर्ज मामले में आरोपी जमानत पर हैं. इसके बावजूद अब उसी कंपनी को नए नाम से बिजली कनेक्शन दे दिया गया है. बताया जा रहा है कि कंपनी के पूर्व मालिक ने इसे छत्तीसगढ़ के एक उद्योगपति को बेच दिया, जो अब इस विवाद में फंस गया है.

सूत्रों का कहना है कि कंपनी पर 30 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है, लेकिन विभागीय मिलीभगत के चलते नए नाम से कनेक्शन जारी कर दिया गया. इस पूरे प्रकरण में करोड़ों रुपये के लेन-देन की बात सामने आ रही है. मामले के खुलासे के बाद आदित्यपुर क्षेत्र के बिजली विभाग के कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. फिलहाल विभागीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग उठ रही है.

