आदित्यपुर: जिस खतरे की अनदेखी करीब एक साल से की जा रही थी, आखिरकार उसने खूनी रूप ले लिया. जियाडा- स्वर्णरेखा परियोजना की बाउंड्री से सटी सर्विस लेन पर फास्ट फूड दुकानों और ठेलों के अवैध जमावड़े के बीच मंगलवार- बुधवार की देर रात हुए विवाद में मानगो निवासी शेखर की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल है. घटना में कुछ अन्य युवकों के घायल होने की भी सूचना है.



अब पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने और आरोपियों की पहचान में जुटी है. मगर इस घटना ने उससे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि सर्विस रोड को लंबे समय से कथित तौर पर व्यावसायिक अड्डे में तब्दील होने देने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ?
स्थानीय स्तर पर यह इलाका ‘खाऊ गली’ के रूप में विकसित हो चुका था. आरोप है कि सर्विस लेन पर करीब एक साल से फास्ट फूड विक्रेताओं का कब्जा बढ़ता गया, लेकिन नगर निगम, पुलिस- प्रशासन और जियाडा के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी. जियाडा की ओर से दावा किया जाता रहा है कि संबंधित विभागों को अतिक्रमण की सूचना दी गई, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. वहीं नगर निगम से जुड़े स्तर पर यह दावा सामने आता रहा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही ‘ऊपर से’ दबाव आने लगता है.
रोजगार की आड़ या नियमों की अनदेखी ?
अतिक्रमण हटाने की कोशिशों के दौरान रोजगार का सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक सर्विस रोड पर सुरक्षा, यातायात और कानून- व्यवस्था की कीमत पर किसी गतिविधि को अनियंत्रित छोड़ना भी गंभीर सवाल पैदा करता है. यदि संबंधित विभागों को पहले से स्थिति की जानकारी थी, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि कार्रवाई रोकी गई तो किसके निर्देश पर ?
पुलिस के अनुसार देर रात करीब 12:30 बजे फास्ट फूड ठेले के पास युवकों के बीच विवाद हुआ, जो मारपीट में बदल गया. घायलों को TMH ले जाया गया, जहां शेखर को मृत घोषित कर दिया गया. एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के अनुसार आपसी विवाद में एक युवक की मौत हुई है और एक अन्य गंभीर रूप से घायल है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
हत्या के आरोपी पकड़े जाएंगे तो आपराधिक जिम्मेदारी तय होगी, लेकिन घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल भी सामने ला दिया है. आखिर सर्विस रोड पर कथित अतिक्रमण किसकी अनुमति या अनदेखी से फलता-फूलता रहा ? शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई ? अभियान किसके दबाव में रुका ? और सबसे बड़ा सवाल- क्या शेखर की मौत के बाद ही व्यवस्था को इस ‘खाऊ गली’ में छिपा खतरा दिखाई देगा ?

