आदित्यपुर: झामुमो नेता गणेश महाली और विवेक उपाध्याय (अर्जुन सिंह वालिया) के बीच जमीन विवाद मामले की जांच जारी है. अंचल अधिकारी ने दोनों पक्षों के कागजात के आधार पर जांच शुरू कर दिया है. फिलहाल उन्होंने दोनों पक्षों को जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. साथ ही यह भी कहा है कि यदि विवादित जमीन पर कोई भी पक्ष यदि कब्जा करने या किसी भी प्रकार की गतिविधियां संचालित करने का प्रयास करता है तो उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा.

अंचल अधिकारी कुमार अरविंद बेदिया ने बताया कि जिस जमीन पर दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं वह जमीन मूल रूप से अनाबाद बिहार सरकार की है. मगर दस्तावेज के आधार पर प्रथम पक्ष यानी विवेक उपाध्याय और अर्जुन सिंह वालिया का पक्ष मजबूत है. वैसे इसमें कुछ कागजात और न्यायिक आदेश जरूरी है इसके लिए दोनों पक्षों को सक्षम कोर्ट जाने का निर्देश दिया गया है. आदेश की प्रति आने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तबतक उक्त जमीन पर कोई दावा नहीं कर सकता है.
क्या है पूरा मामला
झामुमो नेता गणेश महाली द्वारा टाटा- कांड्रा मुख्य मार्ग पर स्थित नेशनल इलेक्ट्रॉनिक के बगल से सालडीह जाने वाले रोड के किनारे की एक जमीन पर दावा किया गया है. उनका दावा है कि उन्होंने उक्त जमीन 2023 में श्रीकांत कुम्भकार से खरीदी है. बीते सोमवार को महाली श्रीकांत कुंभकार के साथ थाना पहुंचे थे और उनका बयान दर्ज कराया है. इससे पूर्व रविवार को विवेक उपाध्याय ने गणेश महाली के खिलाफ अपने समर्थकों के साथ उक्त जमीन पर पहुंचकर जबरन ताला तोड़कर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. विवेक ने दावा किया है कि उन्होंने जमीन अर्जुन सिंह वालिया से खरीदा है. उधर सोमवार की शाम अर्जुन सिंह वालिया विवेक उपाध्याय के साथ आदित्यपुर थाना पहुंचे और जमीन से संबंधित कागजात पुलिस को सौंपा है. वालिया ने दावा किया है कि इससे पूर्व भी गणेश महाली द्वारा उक्त जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने का प्रयास किया गया था. तब वह भारतीय जनता पार्टी में हुआ करते थे. तत्कालीन थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह द्वारा मामले में दखल अंदाजी करने के बाद गणेश महाली बैकफुट पर चले गए थे. अब जब वे झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हुए हैं तो पार्टी का झंडा- बैनर का प्रयोग कर पुण: जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 2020 में तत्कालीन डीसी के निर्देश पर अंचल अधिकारी द्वारा जमीन की जांच की गई थी और फैसला उनके पक्ष में दिया था. तब से वह उक्त जमीन पर कब्जा कर अपना व्यवसाय कर रहे थे. मगर बार- बार गणेश महाली द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2018 से उक्त जमीन का होल्डिंग टैक्स और बिजली बिल का भुगतान उनके द्वारा किया जा रहा है. आज भी होल्डिंग नंबर और बिजली कनेक्शन उनके नाम पर है. यदि गणेश महाली का दवा इतना मजबूत है तो अब तक उन्होंने अपने नाम से होल्डिंग नंबर और बिजली कनेक्शन क्यों नहीं लिया इसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है कि यदि इस मामले में इंसाफ नहीं मिलता है तो मुख्यमंत्री से फरियाद लगाएंगे.

