सरायकेला: शहर की गलियों में गंदगी हो तो सवाल उठते हैं, उसे साफ करने की पहल हो तो विवाद खड़े किए जाते हैं. आखिर स्वच्छ सरायकेला की कोशिशों को राजनीति के चश्मे से कब तक देखा जाएगा. नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने डस्टबिन लगाने को लेकर हो रही बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जनता को दिखावे और बयानबाजी से नहीं, काम से मतलब है. विकास और स्वच्छता के नाम पर राजनीति करने वालों को सरायकेला की जागरूक जनता अच्छी तरह पहचानती है.


उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की पहल को विवाद में उलझाने के बजाय उसमें सहयोग करना चाहिए. नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि नव निर्वाचित बोर्ड के प्रस्ताव और प्रयास से शहर के विभिन्न चिन्हित स्थलों पर 10 डस्टबिन लगाए गए हैं. इसका उद्देश्य उन स्थानों पर कचरे के बिखराव को रोकना है, जहां बड़ी मात्रा में कूड़ा जमा होने से गंदगी फैलती है और संक्रमण की आशंका बनी रहती है. यह कदम किसी व्यक्तिगत श्रेय के लिए नहीं, बल्कि शहरवासियों की सुविधा और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
मनोज कुमार चौधरी ने शहर की मौजूदा कचरा संग्रहण व्यवस्था की कठिनाइयों को सामने रखते हुए कहा कि कुछ वर्ष पहले नगर विकास विभाग के प्रयास से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू की गई थी. उस समय छह गाड़ियों के माध्यम से कचरा उठाया जाता था, लेकिन वर्तमान में चार गाड़ियां खराब पड़ी हैं. ऐसे में केवल दो गाड़ियों के सहारे कचरा संग्रहण का काम चल रहा है.
उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के कारण पूरे शहर से नियमित रूप से कचरा उठाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. जिन स्थानों पर अधिक मात्रा में कचरा जमा होता है, वहां डस्टबिन की व्यवस्था करना व्यावहारिक जरूरत है. इसका मकसद गंदगी को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि कचरे को एक जगह एकत्रित कर आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखना है.
अध्यक्ष ने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था का मूल उद्देश्य घर-घर से कचरा संग्रहण करना और उसका उचित निष्पादन सुनिश्चित करना है. शहरों को डस्टबिन-मुक्त रखने की अवधारणा भी इसी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए है। लेकिन जब संसाधनों की कमी और स्थानीय परिस्थितियों के कारण कुछ स्थानों पर कचरा जमा होने की समस्या सामने आती है, तो उसका व्यावहारिक समाधान तलाशना भी जरूरी हो जाता है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि डस्टबिन लगाने के नियमों और प्रक्रिया के संबंध में उपायुक्त के समक्ष भी नियम-कानून के आलोक में बात रखी गई है, ताकि मामले का उचित प्रशासनिक परीक्षण हो सके. नगर पंचायत बोर्ड नियमानुसार शहर की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है.
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि शहर की स्वच्छता से जुड़ा कोई भी प्रयास राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं बनना चाहिए. जब सार्वजनिक स्थलों पर कचरा जमा होता है, तब लोग नगर पंचायत से सफाई की मांग करते हैं. लेकिन जब उसी समस्या के समाधान के लिए कोई कदम उठाया जाता है, तब उस पर विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि समाजसेवा का अर्थ जनता की समस्याओं का समाधान करना है, न कि जनहित के कार्यों को अनावश्यक विवाद में फंसाना. शहर के विकास में सकारात्मक सोच, आपसी सहयोग और जिम्मेदारी की जरूरत है। स्वच्छता किसी एक व्यक्ति, दल या बोर्ड की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है. नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि सरायकेला का विकास किसी व्यक्ति विशेष के नाम या श्रेय का विषय नहीं है. यह शहर के लोगों की सुविधा, बेहतर वातावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है. बोर्ड की प्राथमिकता शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाना है. इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के बीच लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है. कौन केवल बयान दे रहा है और कौन जमीन पर उतरकर समस्याओं के समाधान की कोशिश कर रहा है, इसका फैसला जनता स्वयं करती है। विकास का दिखावा करने या समाजसेवा का मुखौटा पहनकर सकारात्मक प्रयासों पर सवाल उठाने से शहर का भला नहीं होगा. असली कसौटी काम और उसका परिणाम है.
मनोज कुमार चौधरी ने शहरवासियों से अपील की कि वे कूड़ा निर्धारित स्थानों पर ही डालें, सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं और नगर पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन, नगर पंचायत, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही सरायकेला को स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जा सकता है.
उन्होंने दो टूक कहा कि सरायकेला की जनता को विवाद नहीं, विकास चाहिए; आरोप-प्रत्यारोप नहीं, समाधान चाहिए. नगर पंचायत का संकल्प स्पष्ट है स्वच्छ सरायकेला, सुंदर सरायकेला और जनहित सर्वोपरि.
प्रमोद सिंह (संपादक)

