सरायकेला: रियासत का दौर भले ही समाप्त हो गया, लेकिन सरायकेला की ऐतिहासिक धार्मिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं. आस्था, संस्कृति और परंपरा की इसी अनूठी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सरायकेला के अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश ने सरकारी दुर्गा पूजा में यजमान की भूमिका निभाई और महा सप्तमी के अवसर पर विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की.


सरायकेला की सरकारी दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रियासतकालीन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, रियासत के विलय के बाद से ही यहां सरकारी खर्च पर दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है. इस पूजा में सरायकेला के अनुमंडल पदाधिकारी यजमान के रूप में शामिल होते हैं. प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन के साथ इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाना अपने आप में सरायकेला की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है.
महा सप्तमी के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय रहा. वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजा-विधि के बीच मां दुर्गा से क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की गई.
अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश ने कहा, सरायकेला की सरकारी दुर्गा पूजा हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है.
ऐसी परंपराएं समाज को अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और आपसी सद्भाव, एकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करती हैं. मां दुर्गा से प्रार्थना है कि सरायकेला सहित पूरे क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे तथा सभी लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाएं.
सरायकेला अपनी ऐतिहासिक रियासत, समृद्ध लोकसंस्कृति और छऊ नृत्य जैसी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. यहां की धार्मिक परंपराएं भी इस ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा हैं. सरकारी दुर्गा पूजा में अनुमंडल पदाधिकारी का यजमान बनना इसी परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है.
रियासत की सत्ता भले इतिहास बन गई, लेकिन मां दुर्गा के प्रति आस्था और परंपरा के प्रति सम्मान आज भी सरायकेला की पहचान बने हुए हैं. महा सप्तमी पर हुई पूजा-अर्चना ने इसी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था की झलक पेश की.
Video

