‘नगर पंचायत अध्यक्ष मुर्दाबाद’ और ‘बकाया वेतन का भुगतान करो’ के नारों से गूंजा शहर, कार्यपालक पदाधिकारी सोमा खंडैत बोलीं—ट्रेजरी में तकनीकी कारण से अटका भुगतान, जल्द मिलेगी राशि


जामताड़ा: शहर को साफ-सुथरा रखने वाले सफाईकर्मियों का धैर्य गुरुवार को जवाब दे गया। तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज सफाईकर्मियों ने सफाई का काम छोड़कर शहर की सड़कों पर खुद कचरा फैलाकर अपना विरोध जताया. कायस्थ पाड़ा, मुख्य बाजार और टावर चौक समेत शहर के विभिन्न हिस्सों में गंदगी फैल गई. इस दौरान सफाईकर्मियों ने नगर पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. ‘नगर पंचायत अध्यक्ष मुर्दाबाद’ और ‘तीन महीने के बकाया वेतन का भुगतान करो’ जैसे नारों से शहर का माहौल गूंज उठा.
शहर की सफाई करने वाले कर्मचारियों का अपने हाथों से कचरा फैलाकर विरोध जताना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया. एक ओर जहां बाजारों में गंदगी से आम लोगों और दुकानदारों को परेशानी हुई, वहीं दूसरी ओर इस विरोध ने सफाईकर्मियों के परिवारों पर गहराते आर्थिक संकट को भी सामने ला दिया. दुर्गापूजा के मौके पर जब दूसरे परिवार त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं, तब इन कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाने और बच्चों की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है.
तीन महीने से वेतन बकाया, त्योहार की खुशियों पर ग्रहण
सफाईकर्मियों की परेशानी सिर्फ वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है. तीन महीने से मेहनताना नहीं मिलने के कारण राशन, बच्चों की पढ़ाई, दवा और घर के दूसरे जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है. दुर्गापूजा के दौरान बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदने और घर में त्योहार की तैयारी करने की उम्मीद भी आर्थिक तंगी के बीच कमजोर पड़ रही है.

कर्मचारियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनसे शहर की सफाई का काम लिया जाता है, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके परिवारों का भरण-पोषण प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि आश्वासन से घर का चूल्हा नहीं जलता और न ही बच्चों की जरूरतें पूरी होती हैं. ऐसे में अब उन्हें बकाया वेतन का भुगतान चाहिए.
ट्रेजरी में तकनीकी कारण से अटका भुगतान : सोमा खंडैत
सफाईकर्मियों के विरोध और बकाया वेतन के मामले में नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी सोमा खंडैत ने कहा कि ट्रेजरी में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पा रहा है. उन्होंने जल्द ही भुगतान हो जाने की बात कही है. नगर पंचायत की ओर से भुगतान में देरी की वजह तकनीकी समस्या बताई जा रही है, लेकिन कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिलने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है. अब सवाल यह है कि ट्रेजरी में भुगतान की तकनीकी बाधा कब दूर होगी और सफाईकर्मियों के खातों में बकाया राशि कब पहुंचेगी. त्योहार के मौके पर कर्मचारियों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि भुगतान की निश्चित समय-सीमा और वास्तविक राहत की जरूरत है.
सफाई करने वाले हाथों ने ही सड़क पर फैलाया कचरा
गुरुवार को सफाईकर्मियों के विरोध का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों ने ही अपने हाथों से कचरा फैलाकर नाराजगी जाहिर की. कायस्थ पाड़ा, मुख्य बाजार और टावर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में गंदगी फैलने से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई.
इससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, विरोध का यह तरीका सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक स्वच्छता के लिए चुनौती बना, लेकिन इसके पीछे कर्मचारियों की तीन महीने से वेतन नहीं मिलने की शिकायत है. इस स्थिति का समाधान निकालने के लिए कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है.
आश्वासन नहीं, अब भुगतान का इंतजार
सफाईकर्मियों के विरोध ने नगर पंचायत के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ शहर की सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना है, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना है. दुर्गापूजा के दौरान शहर के बाजारों और प्रमुख चौक-चौराहों पर गंदगी का फैलना आम लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है.
ऐसे में जरूरी है कि तकनीकी बाधा दूर कर जल्द भुगतान किया जाए और सफाईकर्मियों को राहत मिले. शहर को स्वच्छ रखने वाले इन कर्मचारियों के घरों में भी त्योहार की खुशियां पहुंचनी चाहिए. आखिरकार, जो हाथ रोज दूसरों के लिए स्वच्छ वातावरण तैयार करते हैं, उनके अपने घरों में भी चूल्हा जलना और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आना जरूरी है.
अब निगाहें नगर पंचायत के आश्वासन पर टिकी हैं—क्या दुर्गापूजा से पहले तीन महीने का बकाया वेतन सफाईकर्मियों के खातों में पहुंच पाएगा, या कर्मचारियों को एक बार फिर इंतजार करना पड़ेगा?
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

