आदित्यपुर: अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करने वाली आदित्यपुर पुलिस की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है. एक ओर जीआर कॉलोनी में रविवार को हुए मारपीट की घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेज दिया, वहीं दूसरी ओर एस टाइप चौक पर अनिकेत सिंह के साथ मारपीट और कथित हथियार प्रदर्शन के मामले में नामजद आरोपी 11 दिन बाद भी गिरफ्त से बाहर हैं. दोनों मामलों में कार्रवाई की अलग-अलग रफ्तार ने पुलिस की जांच और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.


एस टाइप में मारपीट और हथियार दिखाने का आरोप, गिरफ्तारी का इंतजार
एक अक्टूबर की रात एस टाइप चौक पर आशियाना निवासी अनिकेत सिंह के साथ मारपीट की घटना हुई थी. इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. अनिकेत ने दीपू मिश्रा, दीपक मिश्रा, धीरज सिंह राजपूत और सन्नी सहित अन्य लोगों पर मारपीट का आरोप लगाया था. उसका यह भी आरोप था कि दीपू मिश्रा ने हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया था.
जानकारी के अनुसार, मामले के जांच अधिकारी पीड़ित से दो बार पूछताछ कर चुके हैं. इसके बावजूद नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुलिस की जांच आखिर किस दिशा में बढ़ रही है ?
जीआर कॉलोनी मामले में त्वरित कार्रवाई, तीन भेजे गए जेल
दूसरी ओर रविवार को जीआर कॉलोनी में काली मंदिर के पीछे नाले के समीप पेशाब करने को लेकर हुए विवाद में एक युवक के साथ कथित तौर पर 10 से 12 लोगों ने मारपीट की. सूचना पर पहुंची पुलिस की बाइक पेट्रोलिंग टीम ने घायल को बचाकर इलाज कराया.
पीड़ित की शिकायत पर आदित्यपुर थाना कांड संख्या 286/26 दर्ज किया गया. पुलिस ने गौरव केराई उर्फ गुड्डू, विशाल थापा उर्फ विकास और आकाश हांसदा को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
एक मामले में तत्परता, दूसरे में देरी क्यों ?
जीआर कॉलोनी मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद एस टाइप प्रकरण में गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि, दोनों मामलों में साक्ष्य और जांच की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. केवल प्राथमिकी में नामजद होने से किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं होता.
फिलहाल एस टाइप मामले में गिरफ्तारी नहीं होने की वजह पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस को आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाने में कठिनाई हो रही है या देरी की कोई दूसरी वजह है ?पुलिस की निष्पक्षता और विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि दोनों मामलों में साक्ष्यों के आधार पर पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई हो.
प्रमोद सिंह (संपादक)

